विशेष अदालत, अयोध्या प्रकरण ने 30 सितंबर 2020 को विवादित ढांचा विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह व उमा भारती, सांसद साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में विशेष अदालत ने सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बहस पूरी हो गई। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने अपील की पोषणीयता (सुनवाई योग्य है या नहीं) पर फैसला सुरक्षित कर लिया। मामले में अपीलार्थी अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद व एक अन्य, राज्य सरकार और सीबीआई की ओर से बहस की गई।
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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व सीबीआई के वकीलों ने अपील की पोषणीयता पर सवाल उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अपीलार्थी मामले में वादी नहीं थे। लिहाजा वे मौजूदा याचिका दाखिल नहीं कर सकते हैं। यही नहीं अपीलार्थी इस मामले के पीड़ित भी नहीं हैं। इसलिए सीआरपीसी की धारा 372 के वर्तमान अपील दाखिल नहीं कर सकते हैं। वहीं याचियों की ओर से बताया गया कि वे विवादित ढांचा गिराए जाने की वजह से पीड़ित पक्ष हैं। ऐसे में उन्हें विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देने का अधिकार है।
गौरतलब है कि विशेष अदालत, अयोध्या प्रकरण ने 30 सितंबर 2020 को विवादित ढांचा विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह व उमा भारती, सांसद साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था। वर्तमान अपील में कहा गया है कि दोनों याची उक्त मामले में न सिर्फ गवाह थे बल्कि घटना के पीड़ित भी हैं। उन्होंने विशेष अदालत के समक्ष प्रार्थना पत्र दाखिल कर खुद को सुने जाने की मांग की थी लेकिन विशेष अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था।