लखनऊ। कुकरैल रिवरफ्रंट की जद में आने वाले अकबरनगर की 102 दुकानों, 1200 घरों का वजूद बचेगा या मिटेगा, यह फैसला आज हो जाएगा। यहां के 27 कारोबारी एलडीए के ध्वस्तीकरण के नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण में गए हैं।
बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट का जो आदेश आएगा, उसके आधार पर प्रशासन कार्रवाई करेगा। उधर, सुनवाई को लेकर मंगलवार को अकबरनगर के कारोबारियों व बस्ती के परिवारों में चर्चा होती दिखी। याचिका दाखिल करने वालों को राहत नहीं मिली तो प्रशासन मोहलत दिए बिना ही दुकानें, घर ध्वस्त कर सकता है।
बुधवार को जिन कारोबारियों की याचिका पर सुनवाई होगी, उन्हें मंडलायुक्त की कोर्ट से राहत नहीं मिली थी। मंडलायुक्त ने 27 कारोबारियों, मकान को लेकर 50 लोगों की याचिका को खारिज कर आधी रात को दुकानों, घरों पर पांच पेज का नोटिस चस्पा कराया था।
पीएम आवास ले चुके, फिर भी खाली नहीं कर रहे अवैध घर
अकबरनगर में कुकरैल रिवरफ्रंट के भीतर घुसकर अवैध तरीके से घर बनाने वालों में से 50 से अधिक परिवार पूर्व में ही प्रधानमंत्री आवास योजना में एलडीए से सस्ते में घर ले चुके हैं। इसके बाद भी अवैध रूप से बनाए घर खाली नहीं कर रहे। बस्ती के लोगों ने बताया कि एलडीए की शारदानगर योजना में डूडा के जरिये ये पीएम आवास आवंटित किए गए थे। इनमें से अधिकतर ने प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा कर लिया है, जिनमें इनके परिवार के दूसरे सदस्य रह रहे हैं। एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने कहा कि अकबरनगर में जिन परिवारों के मुखिया शारदानगर योजना में प्रधानमंत्री आवास ले चुके हैं, वे दोबारा ऐसे आवास के लिए पंजीकरण कराएंगे तो उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।