लखनऊ। व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया के पेज, हर खास-ओ-आम अपने दिल अजीज कलाकार राजू श्रीवास्तव के निधन पर शोक जताते नजर आया। किसी ने उनके साथ फोटो साझा की तो किसी ने अपनी भावनाएं और उनके साथ बिताए पलों से उन्हें याद किया। किसी के लिए राजू भइया तो किसी के लिए गजोधर भइया..., हंसते-मुस्कुराते, अपनी अलहदा भाव-भंगिमाओं से गुदगुदाते फोटो सोशल मीडिया पर दिनभर छाए रहे। कहीं मोमबत्ती जलाकर तो कहीं मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
अखिल भारतीय चित्रांश महासभा के राष्ट्रीय कार्यालय में शोक सभा का आयोजन किया गया। प्रदेश प्रवक्ता नेपोलियन सक्सेना, राष्ट्रीय प्रवक्ता वीरेंद्र सक्सेना, विनोद श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव समेत अन्य मौजूद रहे। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा लखनऊ के महासचिव आलोक श्रीवास्तव व अनुपम श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रशंसकों ने 1090 चौराहे पर मोमबत्ती जलाकर दो मिनट का मौन रखकर राजू श्रीवास्तव को श्रद्धांजलि दी।
35 साल पुरानी थी राजू से दोस्ती
मेरे प्रिय गजोधर यानि राजू श्रीवास्तव ने सहज हास्य के जो पहाड़ खड़े कर दिए वो अब तक कोई नहीं कर पाया। राजू से मेरा परिचय 35 साल पुराना है। कानपुर के एक कवि सम्मेलन से पहले उनको माइक संभालना था। उस समय सार्वजनिक शौचालयों की शुरुआत ही थी। राजू ने उसके उद्घाटन समारोह का हास्य चित्र प्रस्तुत किया था। फिर तो राजू से दोस्ती हो गई। लखनऊ आने पर मुलाकात अवश्य करना या व्यस्त हों तो फोन करना जरूरी था। राजू ने अपने शोज में भी कई बार मुझे एंकरिंग के लिए आमंत्रित किया। अभी गत मार्च में मुझे हार्ट अटैक हुआ था तो राजू मुझे देखने घर आए और हार्ट अटैक के बाद के जीवन पर मुझे लंबा परामर्श दिया क्योंकि वो खुद एंजियोप्लास्टी करा चुके थे। हम लोगों का प्लान संयुक्त रूप से एक अवधी हास्य धारावाहिक बनाने का था जिसको दीपावली के बाद शुरू करने का प्लान था। पर उससे पहले ही गजोधर चले गए।
- सर्वेश अस्थाना
उनके व्यक्तित्व में बड़प्पन था
मेरी एक बार उनसे 1995 में हिंदी संस्थान के प्रेमचंद सभागार में एक गीत संकलन ’निर्माण के गीत’ के विमोचन के दौरान मुलाक़ात हुई थी। उस पुस्तक में मैं भी सह रचनाकार था। जिस तरह वे मेरे बगल में बैठे, बातें की। यह उनके व्यक्तित्व का बड़प्पन था। कहने लगे, आप लोग साहित्यकार हैं, आप लोगों के आगे मैं कहां, यह उनकी विनम्रता ही थी। इसके बाद उनसे फोन पर बातचीत का सिलसिला चल पड़ा। मैं अपनी संस्था बिम्ब कला केंद्र से उनका शो कराना चाहता था। उन्होंने कहा यदि वो कभी कानपुर, आयेंगे तो अवश्य स्वयं अकेले ही शो आइटम दे देंगे। अब ये वादा अधूरा रह गया।
- राजेश अरोरा शलभ, वरिष्ठ हास्य कवि व गायक
...और राजू श्रीवास्तव के जाते ही खाली हो गया था पंडाल
लखनऊ। सीता से प्यार करोगे तो राम बनोगे, राधा से प्यार करोगे तो घनश्याम बनोगे, जबरदस्ती प्यार करोगे तो आसाराम बनोगे..., इस जैसी अनगिनत पंक्तियां, किस्से सुनाक र लखनऊ को हंसाने वाले राजू श्रीवास्तव हमारी स्मृतियों का अहम हिस्सा बन गए हैं। लखनऊ से अपनी हंसी-ठिठोली के माध्यम से एक ऐसा रिश्ता जोड़ा है उन्होंने जो अटूट है।
बात 24 जनवरी 2020 की है, जब उत्तर प्रदेश दिवस के अवध शिल्पग्राम के मंच पर मौजूद थे राजू श्रीवास्तव। उन्होंने जब माइक संभाला तो खूब हंसाया। कार्यक्रम खत्म होने के बाद तो जैसे सेल्फी लेने की होड़ लग गई थी। जब तक मंच पर कार्यक्रम चलता रहा लोग जुटे रहे। भीड़ के साथ पुलिसकर्मी भी बैठकर उनके कार्यक्रम का आनंद उठाते रहे। इसके बाद जैसे ही राजू श्रीवास्तव कार्यक्रम खत्म गए तो पूरा पंडाल ही खाली हो गया।
कुछ स्मृतियां ऐसी भी
- 20 मार्च 2019 को होली के अवसर पर स्वागत समारोह का आयोजन हुआ था। बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे राजू श्रीवास्तव। होलिका दहन में शामिल हुए फिर अपने अंदाज में होली के त्योहार को हास्य से भर दिया था।
- 24 जनवरी 2021 को रुद्राक्ष वेलफेयर सोसायटी के संयोजन में सरोजनीनगर के नटकुर गांव के खेल मैदान में क्रिकेट प्रीमियर लीग का फाइनल मैच हो रहा था। उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के अध्यक्ष राजू श्रीवास्तव भी वहां मौजूद थे। इस दौरान भी उनकी कॉमेडी जारी रही और मैच समाप्ति पर उनके चुटीले व्यंग्य सुनकर क्रिकेट खिलाड़ी भी लोटपोट हो गए।