ट्रॉमा सेंटर में बुधवार देर रात आए गंभीर मरीज को डॉक्टरों ने इलाज के बजाये ओपीडी में दिखाने की बात कहकर लौटा दिया।
इसके बाद परिवारीजन उसे ट्रॉमा सेंटर के बाहर लेकर पड़े रहे। इस दौरान बृहस्पतिवार तड़के चार बजे उसकी तबियत अचानक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सुल्तानपुर के कादीपुर निवासी तीस वर्षीय युवक को उसकी पत्नी ललिता बुधवार देर रात ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंची थी।
ललिता ने बताया कि पेट में दर्द और तेज बुखार की शिकायत के बाद रात को ट्रॉमा पहुंचे।
डॉक्टरों ने इमरजेंसी में दिखाने के बाद ओपीडी में दिखाने की बात कहकर बिना इलाज के बाहर निकाल दिया गया।
इसके बाद रैन बसेरे में पड़े रहे। करीब साढ़े तीन बजे तबियत अधिक बिगड़ गई और मरीज की सांस फूलने लगी।
इस बीच डॉक्टर को बुलाने के लिए गए तो कर्मचारियों ने गेट पर रोक लिया और कहा कि सुबह होते ही ओपीडी में दिखा लेना।
अभी कुछ नहीं हो सकता है। इसके आधे घंटे बाद करीब चार बजे मरीज की तबियत अधिक बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
इसके बाद परिवारीजन गेट पर रोने बिलखने लगे। कर्मचारियों ने हंगामा, बवाल और शिकायत होने की आशंका देख शव वाहन से युवक के परिवारीजनों को ट्रॉमा परिसर से घर भेज दिया।
वहीं, सीएमएस डॉ. एससी तिवारी का कहना है कि इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है।
ट्रॉमा में रात में आए मरीज को हर हाल में इलाज मिलता है। ऐसी किसी लापरवाही की सूचना नहीं है। शिकायत मिलेगी तो पूछताछ की जाएगी।