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जिले के बाहर नहीं ले जा सकेंगे कोरोना पीड़ित का शव

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लखनऊ। राजधानी में 10 हजार बेडों के लक्ष्य के सापेक्ष तैयारी की जा रही है। कोरोना पीड़ित का शव जिले से बाहर ले जाकर अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं होगी। शव को कोरोना प्रोटोकाल के तहत भेजने की जिम्मेदारी अस्पताल की होगी। यदि शव वाहन उपलब्ध नहीं होगा तो उसकी व्यवस्था सीएमओ करेंगे। वहीं लावारिस शव के निस्तारण की व्यवस्था क्षेत्रीय पुलिस करेगी। बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कोविड हॉस्पिटल के संबंध में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने यह जानकारी दी। बैठक में केजीएमसी प्रशासन ने बताया कि तीन डायलिसिस मशीनों की आवश्यकता है, जिसकी कुल लागत 46 लाख है। इस पर भी विचार किया गया। डीएम ने ईएसआई सरोजनीनगर की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए, वहां 45 मरीज क्वारंटीन में हैं। उन्होंने साफ-सफाई के लिए प्रत्येक कोविड अस्पताल को लखनऊ रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा मैकेनिकल क्लीनिंग एंड सैनिटाइजेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। चिकित्सकों को पर्याप्त पीपीई किट देने को कहा। सीएमओ नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मरीज की सैंपलिंग के सातवें दिन यदि रिपोर्ट निगेटिव आती है तो उस दिन से उसे एक टेस्ट बाद डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। बैठक में नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी, उप पुलिस आयुक्त सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, अपर जिलाधिकारी टीजी विश्व भूषण मिश्र, अपर जिलाधिकारी पूर्वी केपी सिंह समेत कई अधिकारी व चिकित्सक मौजूद रहे।
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