लखनऊ। मदेयगंज के त्रिवेणीनगर में रहने वाले शिक्षक नवीन सैमुअल सिंह धर्म से संबंधित व्याख्यान यू-ट्यूब पर अपलोड करते हैं। साइबर जालसाजों ने उनको पोलैंड से गिफ्ट भेजने की बात कही। पार्सल डिलीवरी के लिए एक लॉजिस्टिक कंपनी की तरफ से कॉल आई। कहा गया कि पार्सल में विदेशी मुद्रा सहित कई कीमती सामान हैं। इसे छुड़ाने के लिए रुपये देने होंगे। कई बार नवीन से जालसाजों ने डेढ़ करोड़ रुपये ठग लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने मदेयगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
प्रभारी निरीक्षक मदेयगंज अजय नारायण सिंह के मुताबिक त्रिवेणीनगर निवासी नवीन सैमुअल सिंह शिक्षक हैं। वह ईसाई समुदाय के धार्मिक आयोजनों को यू ट्यूब पर अपलोड करते हैं। अगस्त में उनके पास बिल्टन एक्सप्रेस लॉजिस्टिक कंपनी से जॉन स्पेंसर की कॉल आई। जॉन ने बताया कि पोलैंड से सैमुअल के नाम पर एक पार्सल आया हुआ है, जो डॉ. फेलिक्स वरसा ने भेजा है। यह बात सुन कर सैमुअल भी सोच में पड़ गए। उन्होंने पार्सल भेजने वाले फेलिक्स के नंबर पर कॉल किया तो उसने बताया कि ईसाई समुदाय के कई कार्यक्रम सैमुअल ने अपलोड किए थे। इन्हें देखकर वह प्रभावित हुआ, इसीलिए उन्हें गिफ्ट भेजा है। फेलिक्स से बात होने के बाद सैमुअल ने बिल्टन लॉजिस्टिक के जॉन स्पेंसर को कॉल कर पार्सल मांगा। कॉल जाते ही जालसाज गिरोह सक्रिय हो गया। पीड़ित के मुताबिक पार्सल में हीरे जड़ित घड़ी, सोने का हार, ब्रेसलेट, आईफोन समेत अन्य महंगे उत्पाद होने की बात जॉन स्पेंसर ने बताई। इसके बाद नवीन सेे अलग-अलग खातों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये जमा कराए।
पार्सल पाने के लिए नवीन सैमुअल ने महाराष्ट्र के एक्सिस बैंक के एक खाते में रुपये जमा किए थे। यह खाता विनोद कुमार थापा का था। सैमुअल के मुताबिक उनसे बार-बार पैसे की मांग की जा रही थी। उन्होंने पहले तो कुछ पैसे जमा किया, लेकिन बार-बार मांग के चलते बाद में पैसे देने से इनकार कर दिया। इस पर जॉन स्पेंसर ने कहा कि पार्सल में करीब 5000 पाउंड विदेशी मुद्रा है, आपके खिलाफ मनी लांड्रिंग की कार्रवाई की जा सकती है। इससे वह डर गए और रिश्तेदारों से उधार लेकर व बैंक से लोन कराकर रुपये जमा किए। इसके बाद भी मांग नहीं रुकी तो बृहस्पतिवार को मदेयगंज थाने में तहरीर दी। प्रभारी निरीक्षक अजय नारायण सिंह के मुताबिक बिल्टन एक्सप्रेस लॉजिस्टिक के जॉन स्पेंसर और डॉ. फेलिक्स वरसा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साइबर सेल की मदद से इसकी जांच शुरू की गई है।