फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मरने से पहले दे गया बहनों को नौकरी न करने की सलाह

Tue, 12 Nov 2013 02:21 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
अलीगंज क्षेत्र में एक युवती ने बॉस पर प्रताड़ित करने व सैलरी न देने का आरोप लगाते हुए फांस लगा जान दे दी।
विज्ञापन


इंदिरानगर के एक निजी डॉयग्नोस्टिक सेंटर में बतौर रिसेप्शनिस्ट काम करने वाले युवती के सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस जांच कर रही है।

अलीगंज के छपरतला निवासी सतीश चंद्र मौर्या की बेटी खुशबू (26) ने रविवार रात घर के प्रथम तल पर स्थित अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी।

सोमवार सुबह देर तक खुशबू के नीचे न आने पर छोटी बहन कोमल जगाने पहुंची। खुशबू को फंदे से लटका देख शोर मचाया।

परिवार के लोग उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेने के साथ कमरे को तलाश।

मौके से मिले सुसाइड नोट में खुशबू ने बॉस पर गलत इरादे से परेशान करने और विरोध पर चार महीने से सैलरी न देने की बात लिखी है।

पेंटिंग का काम करने वाले सतीश ने पुलिस को बताया कि खुशबू ने पांच महीने पहले इंदिरानगर स्थित डॉयग्नोस्टिक सेंटर में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम शुरू किया था।

चार महीने से सैलरी न मिलने पर उसने 29 अक्तूबर को नौकरी छोड़ दी थी। सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘माई डीयर मम्मी मुझे माफ करना, मैंने आपको बहुत परेशान किया है।
विज्ञापन


आज आपको सबसे ज्यादा रुलाने जा रही हूं। जान इसलिए देने जा रही हूं क्योंकि, इस जिंदगी से खुश नहीं हूं।

मम्मी, मेरी छोटी बहनों से जॉब मत कराना। मैं नहीं चाहती वे भी मेरी तरह परेशान हों। एक बात और डॉयग्नोस्टिक सेंटर वाले सर सैलेरी नहीं देना चाहते हैं। इसीलिए कॉल और मैसेज का जवाब नहीं दे रहे हैं।’
विज्ञापन


परिवार ने डॉयग्नोस्टिक सेंटर के संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इंस्पेक्टर अलीगंज पीके ओझा का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने का था सपना
सतीश पेटिंग कर घर का पूरा खर्च चलाते हैं। बड़ी बेटी खुशबू ने कुछ माह पहले ही घर की जिम्मेदारी में हाथ बंटाना शुरू किया था।

पिता को खुशबू से बड़ी उम्मीदें थीं। उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।

फूट-फूटकर रो रहे पिता बार-बार कह रहे थे कि गरीबी ने मेरी बेटी की जान ले ली। मां शशि ने बताया कि खुशबू पढ़ने में भी तेज थी।

हाईस्कूल, इंटर व स्नातक अच्छे अंकों से पास करने के बाद फैजाबाद यूनिवर्सिटी से प्राइवेट एमए कर रही थी।

उसका सपना शिक्षिक बन गरीब बच्चों को पढ़ाने की थी। ऑफिस से आने के बाद भी वह जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त में पढ़ाती थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें