प्रदेश में अभी जो व्यवस्था है, उसके तहत साइबर क्राइम से निपटने के संसाधन न के बराबर हैं। पूर्ववर्ती सरकार ने जरूर दो साइबर थाने (लखनऊ व नोएडा) बनाए थे, लेकिन इनमें अब तक कुल 15 केस दर्ज हुए हैं। इसकी वजह यह है कि यहां सिर्फ 25 लाख रुपये से अधिक के साइबर क्राइम के मामले रजिस्टर होते हैं। इससे कम के केस स्थानीय स्तर पर थानों में दर्ज किए जाते हैं। जरूरत पड़ने पर एसटीएफ थाने की मदद ली जाती है।