नौ माह तक गर्भ में मां के प्यार की तपिश महसूस करने के बाद उसने अभी दुनिया को अपनी अधमुंदी आंखों से ठीक से देखा भी नहीं था कि उसी जननी ने एक झटके में गर्भ-नाल के रिश्ते को काट दिया।
महज एक दिन की इस अनामिका को मां के आंचल में चैन की सांस लेने की जगह मिली वह सड़क जहां उसकी सांसें कभी भी साथ छोड़ देतीं, पर एक ममता मूरत ने उसे अपने दामन में सहेजा। अब यह बच्ची चाइल्ड लाइन के संरक्षण में है।
किसी के जीवन का पहला दिन कितना अनमोल होता है यह उसे उसके माता-पिता ही बता सकते हैं जिन्होंने उस खुशी को जिया। लेकिन राजधानी में एक नवजात का यही पहला दिन सड़क पर बीता।
कारण, उसकी मां पता नहीं किस मजबूरी के तहत उसे कपड़े में लपेट कर लावारिस छोड़ गई। शनिवार सुबह 5 बजे सुबह की सैर पर निकली एक नागरिक को वह मिली, जिसने उसे सुरक्षा में पहुंचाया।
1 दिन की यह सुंदर नवजात अब अपनी मां से दूर अजनबियों के पास राजकीय बाल गृह शिशु में रखी गई है।
चाइल्ड लाइन के समन्वयक प्रकाशचंद्र तिवारी ने बताया कि नौबस्ता पुलिया के पास सुबह की सैर पर निकली रेणु पांडेय को कपड़े में लिपटी हुई यह नवजात सड़क पर पड़ी मिली।
इसे उन्होंने उसे अपने साथ घर ले आना ही मुनासिब समझा। घर पहुंचकर उन्होंने बच्ची की देखभाल की और पुलिस को संपर्क किया। मड़ियांव थाना पुलिस ने बच्ची मिलने की सूचना चाइल्ड लाइन को भिजवाई।
चाइल्ड लाइन के कार्यकर्ताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल की ओपीडी में उसकी चिकित्सा जांच करवाई। जांच में बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद इस मामले को बाल कल्याण समिति लखनऊ को दिया गया, जिसने बच्ची को बालगृह में आश्रय दिलाया।