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जालसाज ने यूपी डेस्को से झटका दो सौ करोड़ का टेंडर

Tue, 10 Dec 2013 11:50 AM IST
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
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विभूतिखंड क्षेत्र में संचालित टिस्का होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशकों की जालसाजी की परतें उधड़नी शुरू हो गई हैं।
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मास्टरमाइंड ने निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने के लिए न सिर्फ पांच कंपनियां बनाईं थी,बल्कि यूपी डेस्को से दो सौ करोड़ का टेंडर भी हथिया लिया था।

पुलिस ने टिस्का व उससे जुड़ी कंपनियों के खाते सीज करने के साथ गहन पड़ताल शुरू कर दी है। इस बीच सोमवार को आठ और निवेशकों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं।

सीओ गोमतीनगर ने पुलिस टीम की मदद से कंपनी का दफ्तर खंगाला, लेकिन कुछ खास हाथ नहीं लगा।

कंपनी के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पड़ताल में इससे जुड़ी चार अन्य कंपनियों परिशिष्ट रीयल एस्टेट,इंफ्रा वेंचर प्राइवेट लिमिटेड, परिशिष्ट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड व रेडियन वेव टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम उजागर हुए हैं।

निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने का मास्टरमाइंड कंपनी का सीईओ नदीम बताया जा रहा है।

निदेशक जानकीपुरम के सहारा सिटी निवासी राजेश राठौर व रामा देवी राठौर,आगरा के हिमांशु व ऋतु परिहार,वीर बहादुर सिंह, मुकेश के सहयोग से निवेशकों को फंसाया।
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प्लॉट की खरीद-फरोख्त,सोने-चांदी के धंधे व अन्य व्यवसाय में मुनाफे की लुभावनी योजनाएं समझाई और 10 से 20 प्रतिशत तक मासिक ब्याज का झांसा देकर लाखों रुपये जमा कराए थे।

नई दिल्ली के मायापुरी निवासी मनोज कुमार से 20 लाख हड़पने का मामला दर्ज होते ही कंपनी के गड़बड़ घोटाले की शिकायतें आनी शुरू हुईं और अब तक 15 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।

नदीम ने कुछ दिनों पहले यूपी डेस्को से कंप्यूटर संबंधी कार्य के लिए दो सौ करोड़ का टेंडर हासिल किया था।

10 जनवरी को सौ करोड़ रुपये रेडियन वेव टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के खाते में आने वाले थे। पता चला है कि नदीम खुद को प्रदेश के एक मंत्री के परिवार से जुड़े यूपी डेस्को के प्रबंध निदेशक का करीबी बताता था।

जालसाजों के थे 17 सौ एजेंट
एसओ पंकज सिंह का कहना है कि टिस्का व उससे जुड़ी कंपनियों का ब्यौरा खंगालने पर चौंकाने वाले राज उजागर हुए हैं। जालसाजों ने 17 सौ लोगों को एजेंट बनाकर ठगी की थी।

निवेशकों ने एजेंटों के खिलाफ भी तहरीर दी है। कानून के फंदे में फंस रहे कुछ एजेंटों ने खुद को बेकसूर व ठगी का शिकार बताया है। इनका कहना है कि नदीम व निदेशकों ने एक लाख का निवेश करने पर उन्हें एजेंट बनाया था।

कुछ दिनों तक प्रति क्लाइंट पर छह प्रतिशत कमीशन दिया। रकम देने के साथ एजेंटों को भी निवेश के लिए प्रेरित किया और उनकी रकम भी डकार गया।

अंबेडकरनगर निवासी एजेंट सत्यप्रकाश गुप्ता ने जानकारी दी कि उसने खुद एक लाख से अधिक रुपये जमा किए और 22 अन्य लोगों से निवेश कराया।

मैग्नम से जुड़े थे तार
मास्टरमाइंड नदीम के मैग्नम ग्रुप के निदेशक अरुण चतुर्वेदी व वरुण चतुर्वेदी के तार जुड़े बताए जा रहे हैं। नदीम ने पर्दे के पीछे रहकर मैग्नम फ्रॉड में अहम भूमिका अदा की। अपने हिस्से की रकम नगद लेता रहा।

गुडंबा पुलिस का एक और खेल उजागर
निवेशकों के लाखों रुपये हड़पने के आरोपियों की तलाश में जुटी विभूतिखंड पुलिस को पता चला है कि गाजीपुर थाना क्षेत्र के मोहल्ला शक्तिनगर निवासी मास्टरमाइंड नदीम ने वर्ष 2009 में गुडंबा थाना क्षेत्र में मैगपाई नामक कंपनी खोलकर लाखों का गड़बड़ घोटाला किया था।

मुकदमा दर्ज होने पर मुंबई भाग गया। वहां भी कंपनी खोलकर लाखों की ठगी की। इस बीच गुडंबा पुलिस से साठगांठ करके अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगवा ली।
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पुराना मामला खत्म होने पर पिछले साल मुंबई से लौटा और मैग्नम ग्रुप में साझेदारी की। इसके बाद राजेश राठौर आदि से संपर्क बनाकर टिस्का होल्डिंग व उससे जुड़ी कंपनियां बनाकर करोड़ों का खेल कर डाला।
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