चिप लगाकर पेट्रोल-डीजल चुराने वाले पंप मालिकों की सजा बढ़वाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। लखनऊ के डीएम ने निर्देश दिया है कि एक से अधिक डिस्पेंसर यूनिट में गड़बड़ी करने वाले पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु वितरण अधिनियम की धारा 3/7 के तहत भी कार्रवाई की जाए।
अभी इनके खिलाफ सिर्फ धोखाधड़ी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज है। मुकदमे में धारा 3/7 जुड़ जाने से इनकी सजा को दस साल तक बढ़वाया जा सकेगा। धोखाधड़ी में अधिकतम पांच साल तक की जेल की सजा व जुर्माना का ही प्रावधान है।
27 अप्रैल को एसटीएफ ने लखनऊ के सात पेट्रोल पंपों पर प्रशासन, आपूर्ति व बांट-माप विभाग की टीम के साथ मिलकर छापा मारा था। इसमें पेट्रोल वितरण में सुनियोजित तरीके से हो रही चोरी का खुलासा हुआ था। इसके बाद जिला प्रशासन ने लखनऊ के सभी 202 पंपों की जांच करायी।
इसमें 51 पंपों पर पेट्रोल-डीजल वितरण में गड़बड़ी के साथ 43 पंपों पर मशीन अथवा नोजल में टैंपरिंग कर चिप व डिवाइस लगाकर चोरी का मामला पकड़ा गया। आपूर्ति विभाग व बांट-माप विभाग ने इन 43 पंपों के डीलरों के खिलाफ संबंधित थानों में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था।