फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नैनी जेल में छुपा था माज हत्याकांड का आरोपी

Fri, 11 Oct 2013 06:01 PM IST
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
माज हत्याकांड का एक फरार शूटर इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद है। सर्विलांस से मिली लोकेशन के आधार पर क्राइम ब्रांच ने इसका खुलासा किया।
विज्ञापन


एएसपी (क्राइम) के अनुसार 10 अगस्त 2013 को इलाहाबाद जीआरपी ने उसे चोरी के आरोप में रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था।

क्राइम ब्रांच ने नैनी जेल पहुंचकर आरोपी से पूछताछ की। इस दौरान उसने कुबूला कि बर्खास्त इंस्पेक्टर ने उसे माज की हत्या के लिए बुलाया था।

एएसपी (क्राइम) रवींदर सिंह के मुताबिक, माज हत्याकांड में जेल में बंद बर्खास्त इंस्पेक्टर संजय राय के फरार साथी राकेश कुमार सोनी, रिंकू राय व देवेंद्र दूबे की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी।

इस दौरान शक के घेरे में आए कई लोगों के फोन नंबर भी सर्विलांस पर लिए गए थे। इसमें हत्याकांड के फरार आरोपी राकेश कुमार सोनी उर्फ मामा की लोकेशन इलाहाबाद में पाई गई।
विज्ञापन


छानबीन में पता चला कि राकेश नैनी जेल में बंद है। जीआरपी ने दस अगस्त 2013 को मध्य प्रदेश में सतना के कोल गांव नई बस्ती रिकुटियाटोला वार्ड नंबर-45 निवासी राकेश को चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

पूछताछ में उसने बताया कि संजय राय ने उसे सतना से बुलाया था। लखनऊ में रुकने का इंतजाम भी संजय ने ही किया था। शूटर राकेश अपराध जगत में ‘मामा’ के नाम से जाना जाता है।

इलाहाबाद, लखनऊ व वाराणसी में उस पर कई मुकदमे दर्ज हैं। एएसपी क्राइम ने आरोपी के बयान लेने एवं वारंट बनवाकर लखनऊ लाने के लिए विवचेक को न्यायालय की अनुमति लेने के निर्देश दिए हैं।

भाड़े के अपराधियों से कराया था हमला
एएसपी क्राइम के अनुसार राकेश ने बताया कि उसने बर्खास्त इंस्पेक्टर संजय राय के कहने पर 19 नवबंर वर्ष 2012 को भाड़े के अपराधियों से महिला सब इंस्पेक्टर पर गोली चलवाई थी।
विज्ञापन


हालांकि हमला महज डराने के लिए कराया गया था, ताकि वह मदद मांगने संजय के पास जाए। पुलिस हमलावरों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

ऐसे बनाया था मुखबिर
एएसपी क्राइम ने बताया कि वर्ष 2004 में संजय राय बतौर चौकी इंचार्ज इलाहाबाद में मेजा थाने के मेजा कोहड़ार में तैनात था। उस समय उसने दो पहिया वाहन चोरों का गैंग का खुलासा करते हुए आठ लोगों को दबोचा था।

पकड़े जाने वालों में राकेश और उसका एक साथी भी थे। मगर, संजय ने दोनों को बचाने के साथ ही अपना मुखबिर बना लिया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें