12 सितंबर: टप्पेबाजों ने डीजल टपकने के बहाने हजरतगंज में मोती लॉन के पास से एनआरएचएम के जीएम की कार से लैपटॉप व मोबाइल फोन उड़ा दिया। यही नहीं वारदात के चंद घंटे बाद गंज में ही रायल कैफे के पास से कार सवार महिला का पर्स उड़ा दिया। दोनों ही वारदातों में तमिलनाडु के गिरोह का हाथ होने की बात सामने आई।
14 सितंबर: टप्पेबाजों ने गोमतीनगर के हुसड़िया चौराहे के पास स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में रुपये जमा करने आई महिला को डीजल टपकने का झांसा देकर कार से बैग उड़ा दिया। बैग में 13 लाख रुपये थे। पुलिस मामला दर्ज कर ने तफ्तीश शुरू की। इसमें टप्पेबाजों की भाषा के आधार पर तमिलनाडु के गैंग की हरकत होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
14 सितंबर: टप्पेबाजों ने रुपया गिरने के बहाने कैसरबाग इलाके से पत्रकार अमिता वर्मा का पर्स उड़ा दिया। पर्स में 42 हजार रुपये नगदी समेत एटीएम कार्ड था। हालांकि, आसपास मौजूद ने मौके से एक को दबोच लिया। पुलिस टीम हत्थे चढ़े बदमाश से पूछताछ कर रही है। पकड़ा युवक तमिलनाडु का बताया जा रहा है।
सूबे की राजधानी में तमिलनाडु के टप्पेबाजों का गिरोह सक्रिय है। टप्पेबाजों की नजर खासतौर पर कार सवारों पर रहती है।
बैग या सूटकेस में मोटी रकम होने की भनक लगते ही गिरोह के सदस्य झांसा देकर कार सवार को नीचे उतरने को विवश करते हैं और मौका पाकर सामान पार कर देते हैं।
पुलिस के आंकड़ों के हिसाब से ही 15 दिन में टप्पेबाज 10 से अधिक वारदातें अंजाम दे चुके हैं। इनमें से ज्यादातर पॉश इलाकों में हुईं।
झोपड़पट्टी में ठिकाना बनाए टप्पेबाजों का गिरोह लंबे समय से शहर में सक्रिय है। गिरोह के लोग कई बार पुलिस के हत्थे चढ़े लेकिन गंभीरता से कार्रवाई न होने से लगाम नहीं कसी जा सकी।
कार में रुपये या कीमती सामान लेकर चलते समय बेहद सावधान रहने की जरूरत है। शहर में सक्रिय टप्पेबाज जरा सी भनक लगने पर चपत लगा सकते हैं।
सबसे हिट झांसा गाड़ी से डीजल-पेट्रोल या मोबिल ऑयल टपकने का है। इनके निशाने पर ऐसे लोग रहते हैं जो अकेले हों। काम करने का तरीका भी बेहद शातिराना होता है।
टारगेट तय करने के बाद गाड़ी के पास से गुजरा बदमाश मोबिल ऑयल या डीजल टपकने का झांसा देता है। कार सवार के उतरते ही पहले से घात लगाए दूसरा बदमाश बैग पार कर देता है।
इसी तरह पार्किंग या सुनसान जगह खड़ी गाड़ी में बैग इत्यादि होने पर निशाना बनाते हैं। अब तक ऐसे ज्यादातर मामलों की पड़ताल में तमिलनाडु के लोगों की करतूत उजागर हुई है।
कैसरबगा में महिला पत्रकार अमिता वर्मा की कार से पर्स उड़ाने वाला हरिहरन तमिलनाडु का ही है। पूछताछ में उसने कई वारदातें कुबूली हैं।
गोमतीनगर में महिला के कार से 13 लाख उड़ाने जाने के मामले में भी पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। पिछले दिनों हुई ताबड़तोड़ वारदातों में तमिलनाडु के गैंग का हाथ होने की पुष्टि के बाद पुलिस तेजी से छानबीन में जुट गई है।
फर्जी नाम पते पर गए थे जेल
पुलिस टप्पेबाजी में तमिलनाडु के बीस से अधिक बदमाशों को जेल भेज चुकी है। हालांकि यह पुलिस की लापरवाही ही है कि जेल से छूटने के बाद उनकी खोज-खबर तक नहीं ली गई।
जानकारों का मानना है कि यही टप्पेबाज बेखौफ होकर वारदात कर रहे हैं और पुलिस उनका सुराग नहीं लगा पा रही है। कारण, गिरफ्तारी के समय बदमाशों ने फर्जी नाम-पता दर्ज कराया था, जो अब पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका है।
28 मार्च 2009 में पुलिस ने हजरतगंज में व्यापारी प्रदीप कुमार सिंह की कार से 2.50 लाख रुपये उड़ाने में भी तमिलनाडु के तोंगे मुलई जिले के छेलम केडेवरी निवासी राजेश को दबोचा था।
राजेश ने खुलासा किया कि उसके साथ 18 लोग चारबाग के एक होटल में ठहरकर वारदात कर रहे हैं। हालांकि पुलिस के छापा मारने से पहले पूरा गैंग फरार हो चुका था।
होटल रिकॉर्ड से पता चला कि तमिलनाडु के वी लोकेश के नाम से छह कमरे बुक थे। पुलिस ने इस मामले में होटल के मैनेजर दीपक अग्रवाल को भी कस्टडी में लेकर पूछताछ की थी।
बाद में बनारस से 18 बदमाशों को पकड़ा गया। छानबीन में पता पता चला कि सभी ने गिरफ्तारी के वक्त पुलिस को गलत नाम-पता दर्ज कराया था।
गैंग में महिलाएं व बच्चे भी
पुलिस की मानें तो गैंग में बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। बच्चों व महिलाओं को अपराध में शामिल करने की वजह लोगों की सहानुभूति लेना होती है। कारण, अगर बच्चे को पकड़ भी लिया गया तो कोई ज्यादा पीटता नहीं है। इसके अलावा मामूली धाराओं में कार्रवाई होगी।