आरोपियों ने बताया कि एटीएम की देखरेख का जिम्मा एनसीआर कंपनी के फैजल खान के पास है। उसके पास एटीएम मशीन को खोलने का यूजर नेम व पासवर्ड भी है। हमने वह यूजर नेम और पासवर्ड हासिल कर लिया। एटीएम मशीन में किसी भी प्रकार का की-बोर्ड, यूएसबी डिवाइस या पेन ड्राइव कनेक्ट करना नियम विरुद्ध है।
एटीएम में अक्सर खराबी के कारण फैजल खां ने उन्हें यूजर आईडी व पासवर्ड दे दिया था। जिससे छोटी-मोटी खराबी वह लोग ठीक कर देते थे। इसी यूजर आईडी व पासवर्ड के जरिए। एटीएम का डाटा पेन ड्राइव में कॉपी कर लिया। ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर उसकी रकम बढ़ा दी गई।
मसलन एटीएम से पचास हजार रुपये निकाले गये तो उस राशि को एडिट कर पांच लाख कर दिया जाता था। बाकी की राशि यह लोग निकाल लेते थे। पेन ड्राइव में कॉपी किया गया रिकॉर्ड किसी अन्य माध्यम से कंपनी को भेज दिया जाता था। जिसे कंपनी बैंक को भेज देती थी।
एसटीएफ अफसरों ने बताया कि चूंकि इजे लॉग (इलेक्ट्रानिक जनरल) में की गयी किसी प्रकार की एडिटिंग को सेव किया जाना संभव नहीं है, इस कारण बैंक के डेटाबेस को वास्तविक डेटा ही दिखा। कंपनी द्वारा बैंक को भेजी गयी काउंटर स्लिप व बैंक के डेटाबेस में ईजे लॉग में अंकित ट्रांजेक्शन में तालमेल न होने के कारण चोरी पकड़ी गई। इसे लेकर बैंक ने बाकी की राशि जमा करने के लिए कंपनी को निर्देशित किया। दोनों आरोपियों ने बताया कि अब तक वे एटीएम मशीनों से करोड़ों की चोरी कर चुके हैं।