निवेशकों के करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपी मैग्नम ग्रुप के निदेशकों से फोन पर वार्ता कर मोटी डील करने के मामले में एसएसपी ने बुधवार को एसओ गुडंबा को लाइन हाजिर कर दिया।
वार्तालाप की सीडी सामने आने पर कांस्टेबल रणधीर सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। मामले की जांच सीओ गोमतीनगर को सौंपी गई है।
एसएसपी जे रविंदर गौड ने मैग्नम सीडी प्रकरण में जांच के घेरे में आए एसओ गुडंबा राम प्रसाद यादव को लाइन हाजिर कर दिया है।
इससे पहले थाने के वसूली अधिकारी के रूप में चर्चित कांस्टेबल रणधीर सिंह को निलंबित किया जा चुका है। मामले की जांच सीओ गोमतीनगर विद्यासागर मिश्रा को सौंपी गई है।
मालूम हो कि गुडंबा क्षेत्र में संचालित मैग्नम ग्रुप के संचालक अरुण चतुर्वेदी, वरुण चतुर्वेदी व नीलम चतुर्वेदी ने लुभावनी योजनाओं का प्रचार करके सैकड़ों लोगों को जाल में फंसाकर करोड़ों का निवेश कराकर हड़प लिया।
तगादा करने पर निवेशकों से मारपीट व धमकाना शुरू कर दिया। ठगी का शिकार बने निवेशकों ने गुडंबा थाने में शिकायत की। सुनवाई न होने पर एसएसपी से गुहार लगाई।
इस पर निदेशकों के खिलाफ 67 मामले दर्ज किए गए। तफ्तीश में लीपापोती की शिकायत पर एसएसपी ने सीओ गोमतीनगर विद्यासागर मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न थानों के पांच दरोगाओं की टीम गठित की।
पड़ताल में जुटी टीम ने निदेशकों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो गुडंबा थाने में तैनात कांस्टेबल रणधीर सिंह ने मदद के लिए डील शुरू कर दी।
उसने निदेशकों से मोबाइल पर संपर्क बनाए रखकर न सिर्फ मोटी रकम की मांग की बल्कि, पुलिस कार्रवाई की जानकारी भी देता रहा। उसने उच्चाधिकारियों के नाम से भी पैसे मांगे।
तीनों निदेशकों व उनके पिता की गिरफ्तारी के बाद अरुण की पत्नी ने विगत दिनों एसएसपी से भेंट करके उन्हें कांस्टेबल रणधीर सिंह द्वारा अपने पति से फोन पर हुई बातचीत की सीडी सौंपी। पुलिस पर रकम न देने पर फंसाने का आरोप लगाया।
संगीन आरोप लगने पर एसएसपी ने अरुण का कॉल डिटेल चेक कराया और कांस्टेबल रणधीर सिंह को निलंबित करने के साथ मामले की जांच सीओ गोमतीनगर को सौंपी। अब इसी मामले में अब एसओ गुडंबा राम प्रसाद यादव को लाइन हाजिर किया गया है।
सख्त कार्रवाई से हिचक रहे अफसर
करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपी मैग्नम के निदेशकों से मदद के नाम पर सौदेबाजी की सीडी व कॉल डिटेल सामने आने के बाद भी पुलिस के आला अफसर सख्त कार्रवाई से हिचक रहे हैं।
पुख्ता प्रमाण उपलब्ध होने के बाद भी दोषी पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार का मुकदमा नहीं दर्ज कराया गया।
कांस्टेबल रणधीर सिंह को निलंबित करने के बाद एसओ राम प्रसाद यादव को लाइन हाजिर करने में कई दिन लग गए।