विशाल के मुताबिक टपरी फैक्टरी से जब शराब निकलती थी तो एक बिल्टी जिस पर एक लोड ट्रक का पास जारी होता था, उस पर दो लोड ट्रक पास कराए जाते थे। लोकल के लिए एक ट्रक पर दो दिनों का पास जारी कराया जाता था, जबकि दूरस्थ जिलों के लिए एक पास चार दिनों के लिए जारी कराया जाता था। इसका फायदा उठाकर उसी बिल्टी पर दूसरा चक्कर लगाकर टैक्स चोरी करते थे। दूसरे चक्कर के समय ट्रकों को फैक्टरी से निकालते समय सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया जाता था और ट्रक के जीपीएस को भी ऑफ कर दिया जाता था।
हर माह 25 से 30 ट्रक शराब अवैध रूप से बेचते थे
विशाल ने बताया कि पिछले पांच साल से अधिक समय से यह खेल चल रहा था। प्रति ट्रक लगभग 32 लाख रुपये की टैक्स चोरी की जाती थी और हर महीने 25 से 30 ट्रक ऐसे ही पास कराए जाते थे। पूरे खेल में शराब फैक्टरी के मालिक के साथ क्षेत्रीय आबकारी वितरक, आबकारी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत रहती थी। उन्होंने बताया कि इस तरह ये लोग सरकार को हर साल 100 करोड़ से ज्यादा की चपत लगा रहे थे।
जिन आबकारी निरीक्षकों को निलंबित किया गया है उनमें सहारनपुर में तैनात अरविंद कुमार वर्मा, उन्नाव में तैनात रवींद्र किशोर, बदायूं में तैनात रामजीत, संभल में तैनात पवन कुमार शर्मा और कानपुर नगर में तैनात ज्योति सिंह शामिल हैं। इसके अलावा कानपुर, बदायूं, उन्नाव और संभल के देशी शराब के थोक गोदाम के लाइसेंस भी निलंबित कर नोटिस जारी किया गया है।