लखनऊ के इंदिरानगर के सेक्टर-18 निवासी डॉक्टर उत्तम त्रिपाठी की मौत के बाद उनके दस साल पुराने नौकर हरदोई के संतोष वर्मा की नीयत बदल गई। वह डॉक्टर की कार चलाता था। शोक में डूबे परिवार को एक और झटका देते हुए उसने जेवर-नकदी समेट लिए और मालिक की टाटा सफारी कार लेकर फुर्र हो गया।
जानकारी पर डॉ. त्रिपाठी की विधवा पूनम और बेटों अंश व आदित्य के होश उड़ गए। बुधवार को डॉक्टर के गनर बस्ती निवासी महेंद्र यादव ने गाजीपुर थाने में अमानत में खयानत की एफआईआर दर्ज कराई।
एसओ आलोकमणि त्रिपाठी का कहना है कि संतोष की तलाश में टीम हरदोई व सीतापुर भेजी गई है। उसके मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया गया है। महेंद्र का कहना है कि संतोष 50 लाख रुपये के सोने-चांदी और हीरे के जेवर तथा सात लाख रुपये नकद ले गया है। यह जेवर और नकदी उसने कब कार में रखे? इस बारे में उसने जानकारी से इन्कार किया है।
डॉ. उत्तम त्रिपाठी किडनी की बीमारी से पीड़ित थे। शनिवार को उनकी मौत के बाद परिवारीजन शव लेकर गोरखपुर स्थित पैतृक आवास रवाना हो गए। यहीं अंतिम संस्कार किया गया।
कार से बोतल लाने का बहाना बना भागा
पुराने नौकर ने तोड़ा विश्वास
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इस दौरान घर पर संतोष के अलावा गनर बस्ती निवासी महेंद्र यादव और रसोईया कन्नौज का रहने वाला भंडारी ही थे। घर व आलमारी की चाबियां भी संतोष के पास ही रहती थीं। मंगलवार को पूनम ने संतोष को फोन कर तीनों को गोरखपुर बुलवाया था।
गनर महेंद्र ने बताया कि मंगलवार शाम संतोष ने कहा कि भूतनाथ मार्केट स्थित आर्यन रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद वहीं से गोरखपुर के लिए निकल जाएंगे।
महेंद्र ने रेस्टोरेंट के बजाए घर पर खाना खाने की बात कही लेकिन, वह अड़ गया। इसके बाद तीनों रेस्टोरेंट पहुंचे। यहां संतोष ने मिनरल वॉटर की बोतल मंगाई। पानी ठंडा था और महेंद्र ने पीने से मना कर दिया।
इस पर संतोष ने कार में सामान्य पानी की बोतल रखी होने की बात कही। वह बोतल लाने की बात कहकर बाहर चला गया। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। संतोष का फोन मिलाया लेकिन, वह स्विच ऑफ था।