छह साल के हुसैन को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि मौसा की हमउम्र बेटियों से उसकी हल्की-फुल्की हाथापाई उसकी जान को ही खतरे में डाल देगी।
सआदतगंज के रुस्तम नगर में रहने वाला हुसैन रोजाना काफी दिनों से अपनी मौसी की बेटियों से लड़ रहा था।
कई बार बहनों से शिकायत भी की, लेकिन हुसैन घर का लाडला था। न पिता मो. नूर सारिक ने कुछ कहा और मां भी उसकी गलतियों पर पर्दा डालती रही।
किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि उनका लाड-प्यार और दुलार किसी को उनके लाडले की जान का दुश्मन बना रहा है।
उसके सगे मौसा को ये बात सालने लगी थी कि हुसैन हदें पार कर रहा है। ऊपर से उसे न कोई डांटने वाला है, न समझाने वाला।
यूनिटी कॉलेज के अपर प्राइमरी सेक्शन में पढ़ रहा हुसैन मंगलवार को स्कूल से घर लौट रहा था कि रास्ते में नूर बाड़ी में रहने वाले उसके मौसा शाह आलम ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस के मुताबिक, उसे घुमाने के बहाने पहले अपनी दुकान ले गया और लोगों से नजरें बचाकर उसे दुकान में ही बांधकर दुकान बंद कर दी।
शाह पर आरोप है कि उसका इरादा हुसैन को ठिकाने लगाने का था। लेकिन, उसके नौकर को पता चल गया था कि हुसैन दुकान में बंद है।
शाम तक हुसैन घर नहीं लौटा, तो उसकी खोज शुरू हुई। परिजनों की हताशा बढ़ने लगी तो पुलिस स्टेशन में अपहरण की एफआईआर भी दर्ज हो गई।
पुलिस की बात सुनकर शाह आलम का नौकर डर गया और उसने हुसैन के आईकार्ड पर उसके पापा का नंबर देखकर उन्हें खबर कर दी।
नूर सारिक ने पुलिस को फोन किया और तुरंत शाह आलम की दुकान पर छापा मारकर हुसैन को छुड़ा लिया गया। पुलिस ने मौसा को भी हिरासत में लेकर थाने भेज दिया।