राजधानी लखनऊ में नाबालिगों के खून के काले कारोबार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। केजीएमयू से महज चंद कदमों की दूरी पर चौक के कंचन मार्केट में निजी ब्लड बैंक से यह कारोबार चल रहा था।
इसके लिए दलालों का रैकेट सक्रिय था जो नाबालिगों को महज 500 रुपये का लालच देकर ब्लड बैंक पहुंचाता था। ब्लड बैंक का स्टाफ रिकॉर्ड में उम्र की हेराफेरी कर खून निकालता और निजी अस्पतालों को सप्लाई करता। एक यूनिट खून के पांच से सात हजार रुपये वसूले जाते थे।
सामने आया है कि यहां से रोजाना 14 से 17 यूनिट ब्लड निजी अस्पतालों को सप्लाई होता था। यह नापाक कारोबार करने वाले कोहली ब्लड बैंक को सील कर दिया गया है। ब्लड बैंक के मैनेजर वीके भटनागर, लैब टेक्नीशियन संतराम यादव को पुलिस ने पकड़ा। हालांकि तीनों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
युवकों की जागरूकता से सामने आई करतूत
यह मामला इलाके के रहने वाले दो युवकों शक्ति साहू और अनंत अग्रवाल की जागरूकता की बदौलत सामने आ सका। इन दोनों ने शुक्रवार को सपा की युवजन सभा के प्रदेश महासचिव मनीष यादव को इसकी जानकारी दी।
मनीष ने खून बेचने वाले नाबालिगों से बात की तो सामने आया कि इस धंधे में एक बड़ा रैकेट सक्रिय है। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना चौक पुलिस, सीएमओ और जिला प्रशासन को दी। इसके बाद पुलिस और सीएमओ की टीम ने ब्लड बैंक में छापा मारा।
खून देता मिला युवक, कहा-दलाल मौसीन लेकर आया था
छापे के दौरान वहां करीब 18 साल का युवक सैफ खून निकलवाते मिला। सैफ के पास मोहान रोड स्थित बी- होप हॉस्पिटल का पर्चा बरामद हुआ था। इसी के आधार पर उसे विजय शर्मा नामक मरीज के लिए रक्तदान करने भेजा गया था।
पूछताछ में सैफ ने बताया कि उसे मौसीन नामक युवक ने खून देने का ऑफर दिया था। उसने कहा था कि एक यूनिट के एक हजार रुपये मिलेंगे जिसमें से पांच सौ रुपए सैफ और पांच सौ रुपसे उसका कमीशन होगा।
सैफ ने बताया कि मौसीन ब्लड बैंक के बाहर ही है। पर वह हाथ नहीं आया। वहीं ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मुकेश पुरी भी वहां नहीं मिले। न ही वो शाम तक सामने आए।
गुस्साई भीड़ ने किया तोड़फोड़, आरएएफ बुलाई गई
पुलिस की छापेमारी की सूचना मिलने के बाद ब्लड बैंक में स्थानीय लोग भी इकठ्ठा हो गए। जब उन्हें खून के काले कारोबार का पता चला तो गुस्साए लोगों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। भीड़ ने ब्लड बैंक के प्रवेश द्वार पर लगे शीशे को तोड़ दिए। मामला और न बिगड़े इसलिए मौके पर रैपिड रिएक्शन फोर्स बुला ली गई।
काले कारोबार के ये गुनहगार
मालिक डॉ. विनय कुमार कोहली और उनकी पत्नी डॉ. चित्रा कोहली। यह दोनों अमेरिका में रहते हैं। पर यहां ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. मुकेश पुरी के नाम से रजिस्ट्रेशन करा रखा है। कर्मचारियों ने बताया कि इन दोनों को काले कारोबार का पता है।
ब्लड बैंक के प्रभारी, मैनेजर वीके भटनागर, लैब टेकभनीशियन संतराम यादव, सुखराज सिंह, आरसी कश्यप और लैब अटेंडेंट परमात्मा प्रसाद गुप्ता इन सभी की मिलीभगत से यह खेल चल रहा था।
ऐसे होता था खेल
डोनर रजिस्टर में नाम पते गलत लिखे जाते। मेडिकल ऑफिसर के कॉलम में सिर्फ लाइन खींच दी जाती।