कानून की छात्रा गौरी श्रीवास्तव हत्याकांड के खुलासे में पुलिस की थ्योरी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं पुलिस दावा कर रही है कि यह खुलासा उसके लिए कैसे टफ जॉब था। वह कैसे कड़ियों को जोड़ते हुए हत्यारे तक पहुंची। पर सवाल उठता है कि सीसीटीवी फुटेज व अन्य माध्यमों से गौरी का मूवमेंट पाथ ट्रेस होने के बावजूद कातिल तक पहुंचने में आखिर हफ्ते भर का वक्त क्यों लगा?
एसएसपी यशस्वी यादव देरी के सवाल पर कहते हैं कि हिमांशु प्रजापति की गौरी श्रीवास्तव से वॉट्सएप पर चैटिंग होती थी। दोनों आपस में कॉल करके बात नहीं करते थे। इसके चलते गौरी के मोबाइल की कॉल डिटेल में उसका नंबर ट्रेस नहीं किया जा सका। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से सिर्फ गौरी के मोबाइल का लोकेशन ट्रेस करके कातिल का सुराग लगाया जा रहा था।
वह 1 फरवरी को दोपहर 1:32 से 3.02 बजे तक मॉडल हाउस इलाके में रही। उसी शाम 6:58 से 7:28 बजे तक यानी आधा घंटा तेलीबाग में शारदा नहर के पास और 7:35 से 7:42 तक यानी सात मिनट ईको पार्क के पास का लोकेशन मिला। मॉडल हाउस इलाके में डेढ़ घंटे का लोकेशन खटकने वाला था। इस पर वॉट्सएप का ब्यौरा लेने के लिए संबंधित कंपनी से संपर्क किया गया लेकिन ब्यौरा नहीं मिला। इसमें काफी वक्त लग गया।
प्रदर्शन ने बढ़ाई परेशानी
एसएसपी के मुताबिक गौरी की सहेली व दोस्तों ने पूछताछ में बताया था कि गौरी की रोहित नामक युवक से दोस्ती थी। पिता शिशिर ने भी इसकी पुष्टि की। पुलिस ने गौरी का फेसबुक अकाउंट खंगाला लेकिन रोहित नहीं मिला, न ही कॉल डिटेल में उसका नंबर था। हिमांशु के हत्थे चढ़ने पर पता चला कि गौरी उसे रोहित के नाम से जानती थी और उसने भी गौरी का नंबर आलोक नाम से सेव किया था।
एसएसपी ने कहा कि वॉट्सएप कंपनी के ब्यौरा उपलब्ध न कराने पर उन्होंने साइबर क्राइम व सर्विलांस सेल को इंटरनेट लॉग एनॉलिसिस के आदेश दिए। दरअसल, कॉल डिटेल से गौरी का लोकेशन उन्हीं स्थानों का ट्रेस हो रहा था, जहां उसके नंबर पर किसी ने बात की या एसएमएस आया, जबकि इंटरनेट लॉग एनॉलिसिस से साफ हुआ कि गौरी किन टॉवरों के नेटवर्क के संपर्क में रही थी।
एसएसपी यशस्वी यादव ने डीजीपी व अन्य अफसरों की मौजूदगी में कहा कि गौरी हत्याकांड को लेकर आंदोलन, प्रदर्शन व आक्रोश ने भी पुलिस का काफी वक्त जाया किया, जबकि यह ऐसी वारदात थी जिसकी न तो पुलिस को पहले भनक लग सकती थी। गौरी खुद दोस्त के साथ गई। वहां बौखलाए दोस्त ने हत्या कर दी, किसी को भनक नहीं लगी। इस वारदात का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती था।