आजमगढ़ के सगड़ी के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या के पीछे सियासी व जातीय रार है या फिर गैंगवार। पुलिस और एसटीएफ की टीमें इन तीन बिंदुओं के सहारे हत्याकांड के सुराग तलाश रही हैं।
शुरुआती पड़ताल और वारदात के पहले से चला आ रहा घटनाक्रम इशारा कर रहे हैं कि एक सियासी साजिश को जेल की सलाखों के पीछे से अंजाम दिलवाया गया।
तफ्तीश के इस इशारे ने राज्य सरकार के एक कद्दावर सियासतदां को शक के घेरे में ला दिया है। शूटरों को तलाश रही पुलिस और एसटीएफ ने वाराणसी के चोलापुर के 50 हजार के इनामी पर अपनी आंखें टिका दी हैं।
गोरखपुर और बनारस की एसटीएफ टीमों ने आजमगढ़ में डेरा डाल दिया है। इसके अलावा एक टीम ने वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद कुंटू सिंह से भी पूछताछ की।
कुंटू-सर्वेश की दुश्मनी का इस्तेमाल
चूंकि सर्वेश की वाराणसी सेंट्रल जेल में बंद ध्रुव कुमार उर्फ कुंटू सिंह से लंबे समय से रंजिश चली आ रही है। इसलिए एसटीएफ और पुलिस ने फिलहाल कुंटू सिंह को ही हत्याकांड की जांच के केंद्र में रख रखा है।
आशंका जताई जा रही है कि कहीं शक के घेरे में आए नेता ने सर्वेश और कुंटू की दुश्मनी का इस्तेमाल अपनी रार निपटाने के लिए तो नहीं किया। या फिर दुश्मन के दुश्मन को दोस्त बनाकर पूर्व विधायक की हत्या को अंजाम दिलाया गया।
पुलिस और एसटीएफ की टीमें इन पहलुओं को करीब से जांच रही हैं। हालांकि कद्दावर नेता पर हाथ डालना पुलिस के लिए दूर की कौड़ी है।
पेशेवर शूटरों ने दिया अंजाम
पुलिस और एसटीएफ का मानना है कि जिस तरह से थाने के पास दिनदहाड़े वारदात की गई, उससे साफ जाहिर है कि उसे अंजाम देने वाले प्रोफेशनल शूटर थे।
कुंटू सिंह से जुड़े कुछ पुराने नामों के अलावा पुलिस टीमों को वाराणसी के चोलापुर के 50 हजार के इनामी की तलाश है। पुलिस को कुछ ऐसे सुराग मिले हैं जो उसकी ओर इशारा कर रहे हैं।
यह इनामी कुख्यात मुन्ना बजरंगी गैंग का भी करीबी है। एसटीएफ जेपी यादव मुठभेड़ कांड से जुड़ी जानकारियां भी जुटा रही है। सूत्रों के मुताबिक, सर्वेश ने कुंटू के लिए कुछ शूटरों को लगाया था। उनमें से कुछ बाद में मुठभेड़ में मारे गए थे।
लंबे समय से चला आ रहा संघर्ष
पूर्व विधायक आजमगढ़ के जिस इलाके से वास्ता रखते थे वहां दो जातियों के बीच लंबे समय से संघर्ष चला आ रहा है। इस संघर्ष के पीछे सियासत और वर्चस्व दोनो ही वजह हैं।
पूर्व विधायक सर्वेश सिंह की जान पर लगातार खतरा मंडरा रहा था। लखनऊ समेत वाराणसी के आसपास के इलाकों में पिछले कुछ सालों में कई पेशेवर शूटर पकड़े गए।
उन लोगों ने पूछताछ में कबूला कि सर्वेश सिंह उनके निशाने पर हैं। उनको आधार बनाकर सर्वेश सिंह ने मुख्यमंत्री से लेकर कई आला अधिकारियों के यहां कई बार सुरक्षा को लेकर गुहार लगाई, लेकिन आजमगढ़ के ही एक कद्दावर सियासतदां के चलते सर्वेश सिंह की गुहार फाइलों में ही दबकर रह गईं।
आजमगढ़ के पुलिस कप्तान ने सरकार को रिपोर्ट भेजी कि सर्वेश सिंह की सुरक्षा को किसी तरह का खतरा नहीं है। बताते हैं कि इस राज्य सरकार के इस कद्दावर नेता से सर्वेश का सियासी के अलावा किसी जमीन का भी विवाद है।