फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जाली नोटों का सबसे बड़ा सौदागर पाकिस्तानी 'काना'

Fri, 02 Aug 2013 10:56 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
जाली नोटों की तस्करी के लिए अब प्रचलित मार्गों का इस्तेमाल बंद कर दिया गया है।
विज्ञापन


जाली नोटों की बड़ी खेप विदेशों से कूरियर के जरिये यहां पहुंच रही है।

इस बात का खुलासा जाली नोटों के बड़े कारोबारी और आतंकियों के सहयोगी इमरान तेली ने एटीएस द्वारा की जा रही पूछताछ के दौरान किया है।

इमरान ने एटीएस को बताया कि अब पाकिस्तान से जाली नोटों के कूरियर हांगकांग, थाईलैंड, दुबई और श्रीलंका जैसे देशों में भेजे जाते हैं।

वहां आईएसआई से जुड़े लोग इन्हें विभिन्न पतों पर भारत भेज देते हैं। यहां आने वाले कूरियर को सीधा खरीददार के जरिये रिसीव करा लिया जाता है या किसी एजेंट के जरिये पहुंचा दिया जाता है।
विज्ञापन


एटीएस को इमरान ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान का इकबाल काना ही सबसे अधिक जाली भारतीय मुद्रा की सप्लाई करवा रहा है।

इकबाल काना आईएसआई से जुड़ा है और पिछले कई वर्षों से इसी काम की जिम्मेदारी संभाले हुए है।

उसने बताया है कि नेपाल व बंगलादेश रूट से आने वाली जाली मुद्रा की कई बार पकड़ होने के बाद इन मार्गों का प्रयोग खासा कम कर दिया गया है।

छोटे सप्लायर भले ही इन मार्गों का प्रयोग कर रहे हों, पर इन रास्तों से बड़ी खेप आनी बंद हो गई है।

एटीएस के सूत्र बताते हैं कि इमरान ने जाली मुद्रा के धंधे से जुड़े कई बड़े लोगों के नाम बताए हैं। साथ ही आईएसआई से जुड़े कई लोगों के नाम भी प्रकाश में आ गए हैं।
विज्ञापन


इसी वजह से आईबी और रॉ जैसी संस्थाओं के लोगों ने भी इमरान से पूछताछ की है। इन संस्थाओं के सदस्य इमरान से मिली जानकारी की तस्दीक कर रहे हैं।

एटीएस के सूत्र बताते हैं कि इमरान द्वारा मिली जानकारी के आधार पर कुछ लोगों को एटीएस ने अपने राडार पर ले लिया है।

उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। एटीएस के सूत्रों के मुताबिक जल्द ही कुछ और लोगों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है।

इमरान ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी दी है, जो हवाला के धंधे से जुड़ी है। उसने बताया है कि आम हवाला कारोबारियों से जाली नोटों का काम नहीं कराया जाता है।

बल्कि कुछ हवाला कारोबारी ऐसे हैं जो आईएसआई के नेटवर्क से जुड़े हैं और इनसे आतंकी संगठन भी समय-समय पर काम लेते रहते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें