खुफिया कैमरों से सेना के जवान और कर्नल की पत्नी की अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी नवीन सिंह बिष्ट के पास मिला सिमकार्ड बिना आईडी के लिया गया था।
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सेना की खुफिया इकाई की पूछताछ के दौरान नवीन ने यह जानकारी दी। नवीन ने बताया कि सिमकार्ड उसने अर्जुनगंज में एसबीआई के पास स्थित एक दुकान से खरीदा था।
सैन्य अफसरों की एक टीम ने शनिवार दोपहर सिमकार्ड बेचने वाली दुकान जाकर दुकानदार से लंबी पूछताछ की। एसटीएफ को बिना आईडी के सिमकार्ड बेचने वाली दुकान के बारे में जानकारी दे दी गई है।
सैन्य कालोनियों में खुफिया कैमरों से ताक-झांक के बाद बिना आईडी के सिमकार्ड लेने से सुरक्षा व्यवस्था तो कठघरे में है ही, सैन्य अफसरों की सक्रियता भी संदेह के घेरे में है।
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नवीन ने पूछताछ में बताया कि बीते एक महीने से वह सैन्य क्षेत्र में बिना आईडी का सिमकार्ड इस्तेमाल कर रहा था और सेना के अत्याधुनिक सर्विलांस उपकरण भी उसे पकड़ नहीं सके।
सेना के सर्विलांस से हुआ खुलासा
नवीन ने बताया कि अश्लील वीडियो की फुटेज और वसूली की चिट्ठी भेजने के बाद वह संबंधित व्यक्ति को इसी सिमकार्ड से ब्लैकमेलिंग के लिए फोन करता था। पीड़ित की शिकायत पर जब एसटीएफ ने उसका नंबर सर्विलांस पर लिया तो सिमकार्ड की कोई आईडी न होने से नवीन के बारे में कुछ पता नहीं लग सका।
नवीन ने जिस दुकान से सिमकार्ड लिया था, वहां जाकर सैन्य अफसरों ने छानबीन और पूछताछ की। दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसटीएफ को सूचना दे दी गई है।
गौरतलब है कि सुल्तानपुर रोड पर स्थित सेना की 25 वायरलेस यूनिट में तैनात सिग्नलमैन अल्मोड़ा निवासी नवीन सिंह बिष्ट को सेना की खुफिया इकाई और एसटीएफ ने शुक्रवार दोपहर गौर इन्क्लेव सैन्य ऑफीसर्स कालोनी से गिरफ्तार किया था। वह उन मकानों को निशाना बनाता था जिनकी छतें सीमेंट की चादरों की होती थीं।
बाथरूम के ऊपर चादरों में छेद करके वह खुफिया कैमरे लगाता था और महिलाओं की अश्लील वीडियो बनाता था। इसके बाद अश्लील वीडियो को एक मेमोरी कार्ड में डाउनलोड कर एक चिट्ठी के साथ उसे महिलाओं के पति के पास भेजकर रुपया मांगता था।
कोरियर वाला बनकर पूछा घर का पता
बिना आईडी वाले सिमकार्ड के इस्तेमाल के कारण सेना की खुफिया इकाई नवीन सिंह बिष्ट के घर का पता नहीं लगा पा रही थी। सेना के अफसरों ने नवीन के मोबाइल फोन पर संपर्क किया। फोन नवीन की पत्नी ने उठाया।
सेना की खुफिया इकाई ने बताया कि वह कोरियर कंपनी से बोल रहे हैं। एक गिफ्ट आया है इसलिए घर का पूरा पता चाहिए। नवीन की पत्नी ने तुरंत घर का पता बता दिया और सेना की खुफिया इकाई वहां पहुंच गई।
दिन भर खंगाला मेमोरी कार्ड का ब्यौरा नवीन सिंह बिष्ट जिस मेमोरी कार्ड का इस्तेमाल अश्लील वीडियो की रिकॉर्डिंग के लिए करता था उसका डाटा रिकवरी के लिए सेना को दिन भर पसीना बहाना पड़ा।
हालांकि इस मेमोरी कार्ड में कुल तीन अलग-अलग अश्लील वीडियो मिली हैं। जिसमें एक तो हवलदार की थी, दूसरी एक कर्नल की पत्नी की और तीसरी एक महिला सैन्य अधिकारी की थी।
सेना ने दिया कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश
सेना ने इस सनसनीखेज मामले के सामने आते ही आरोपी नवीन सिंह बिष्ट के खिलाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दे दिए हैं। नवीन के जेल में रहते हुए भी यह इंक्वायरी चलती रहेगी। जरूरत पड़ने पर नवीन को जेल से इंक्वायरी बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।
विभागीय सजा पर चर्चा शुरू सेना की ओर से कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के बाद दोषी पाए जाने पर आरोपी नवीन सिंह बिष्ट के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? इस पर भी मंथन शुरू हो गया है।
सेना के लीगल सेल में इस बात पर चर्चा हो रही है कि आर्मी एक्ट में इस तरह के आईटी एक्ट के तहत अश्लील वीडियो बनाने का मामला साबित होने पर सेवा से बर्खास्तगी का प्रावधान है या नहीं। लीगल सेल का एक बोर्ड सोमवार को इस मामले की भावी सजा के प्रावधानों को लेकर एक बैठक करेगा।
लोन खत्म करने के लिए अश्लील वीडियो बना पैसे कमाता था
पूछताछ में यह भी पता चला है कि अश्लील वीडियो बनाने के आरोपी नवीन सिंह बिष्ट ने बैंक से लोन लेकर रानीखेत में जमीन खरीदी थी।
बैंक से हर माह लोन की किस्त भी वेतन से कट रही थी। अपना लोन खत्म करने के लिए अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग करने का प्लान उसे फिल्में देखकर आया। सेना अब उसकी खरीदी हुई जमीनों की पड़ताल कर रही है।
बैंक खाते में केवल 300 रुपये सेना ने आरोपी जवान के बैंक खाते को भी शनिवार को खंगाला। पता चला कि नवीन सिंह बिष्ट के बैंक खाते में केवल 300 रुपये ही जमा थे। पिछले छह माह में उसके बैंक से वेतन के क्रेडिट होने और उससे लोन की किस्त के डेबिट होने जैसी इंट्री ही दर्ज हैं।
बाथरूम में खुफिया कैमरे लगाकर फौजियों की बीवियों के वीडियो बनाने वाले नवीन सिंह बिष्ट के खिलाफ कैंट पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा नहीं लगाई।
मोबाइल फोन और कैमरे जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरणों से अश्लील वीडियो बनाने और सोशल मीडिया के माध्यम से बदनामी की धमकी देने के बावजूद आईटी एक्ट की धारा न लगने से कैंट पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक अफसर ने कहा कि कैंट एसओ सहित थाना के किसी पुलिसकर्मी को साइबर एक्ट के बारे में जानकारी ही नहीं है इसलिए यह धारा नहीं जोड़ी गई। सैन्य अफसर भी कैंट पुलिस की इस कार्रवाई को अज्ञानता मान रहे हैं।
एक अफसर ने कहा कि अगर पुलिस को साइबर एक्ट के बारे में जानकारी नहीं थी तो एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी विशेषज्ञ से पूछा जा सकता था। उधर, एसओ सुरेश कुमार यादव का कहना है कि अपराध में इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं हुआ है इसलिए आईटी एक्ट की धारा नहीं जोड़ी गई।