ट्रांसगोमती क्षेत्र में ताबड़तोड़ चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाला एक गिरोह शनिवार शाम पुलिस के हत्थे चढ़ गया। गिरोह के तीन सदस्यों के साथ ही पुलिस ने लाखों रुपये की कीमत के जेवर-नकदी, घरेलू सामान और कई कारें भी बरामद की हैं।
इस गिरोह के सदस्य कारों से घूमकर वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस का कहना है कि रविवार को इस गिरोह का अधिकारिक खुलासा किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह में पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में रहने वाले तीन युवकों और एक अधेड़ का नाम सामने आया है। शनिवार देर रात तक पुलिस तीन लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी थी।
गिरोह के कुछ और सदस्यों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग इलाकों में दबिश दे रही थीं। गिरोह के सदस्य रेकी करने और वारदात को अंजाम देने के लिए कार से चलते थे ताकि पुलिस और पब्लिक के लोगों को उन पर कोई शक न हो।
एक अधिकारी ने बताया कि चोरों का यह गैंग करीब डेढ़ साल से ट्रांसगोमती क्षेत्र में सक्रिय है। अधिकारी के मुताबिक इस गैंग ने गोमतीनगर, विभूतिखंड, महानगर, मड़ियांव, गुडंबा थाना क्षेत्र में सौ से अधिक वारदातें की हैं।
सीसीटीवी कैमरे में आई फोटो से मिली सफलता
पुलिस सूत्रों ने बताया कि चोरों के गैंग ने सितंबर में विश्वासखंड-दो में एक मकान पर धावा बोला था। फोर्ड फिएस्टा कार से आए चोरों ने जिस जगह निशाना बनाया वहां एक सिक्योरिटी कंपनी का ऑफिस था जहां सुरक्षा के पूरे इंतजाम थे।
चोरों ने ऑफिस की खिड़की तोड़कर भीतर घुसने की कोशिश की तो अलार्म बज उठा। सीसीटीवी कैमरे में चोरों की एकदम स्पष्ट फोटो भी आ गई थी। इसके बाद मुखबिरों की मदद से पुलिस शनिवार को चोरों के गिरोह तक पहुंच गई।
चोरों का गैंग यहां बीबीडी के पीछे किराए का कमरा लेकर रह रहा था। पुलिस ने जब इनकी धरपकड़ की तब इलाकाई लोगों को इनकी असलियत का पता चला।
इलाकाई लोगों का कहना है कि अच्छे कपड़े पहनने और कारों से चलने वाले युवक खुद को बिजनेसमैन और प्राइवेट कंपनी का कर्मचारी बताते थे। पुलिस सूत्रों ने कहा कि किराएदार का वेरीफिकेशन न कराने पर मकान मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
कार पर लगा है शासन का लोगो
चोरों के पास से मिली सैंट्रो कार की नंबर प्लेट में शासन का लोगो बना हुआ है। इस लोगो को लगाने के पीछे क्या वजह थी?
पुलिस इसकी छानबीन भी कर रही है। कहीं लोगो लगाकर चोरों का गिरोह सचिवालय के भीतर तो नहीं आता-जाता था या पुलिस को दबाव में लेने के लिए लोगो लगाया गया था, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।