गैंगरेप की शिकार अंबेडकरनगर की युवती न्याय के लिए एसपी की चौखट तक गई। एफआईआर तो हुई, पर कार्रवाई नर्हीं। इस बीच, उसे गर्भ ठहर गया तो लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाते युवती के सब्र का बांध बृहस्पतिवार को टूट गया। वह सुबह करीब साढ़े नौ बजे अस्पताल की टंकी पर चढ़ गई और आत्महत्या की धमकी देने लगी।
घटना की जानकारी होते ही पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में हजरतगंज पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने टंकी पर चढ़ने की कोशिश की तो उसने टंकी से कूद जाने की धमकी दी। फिर उसने अपनी मांगे और फोन नंबर लिखे पर्चे नीचे फेंके। तब सीएमएस आशुतोष दुबे ने उसे फोन मिलाकर समझाया।
पुलिसकर्मियों से बात कराई। तब जाकर करीब एक घंटे बाद वह टंकी से नीचे उतरी। युवती ने आरोप लगाया कि अंबेडकरनगर पुलिस आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है।
तब यहां के आला अफसरों ने अंबेडकरनगर पुलिस को कार्रवाई का निर्देश दिया। इस बीच, युवती के परिवारीजनों को सूचना दे दी गई है। उनके राजधानी पहुंचने तक युवती को झलकारी बाई अस्पताल में रखा गया है।
बंधक बनाकर दुष्कर्म, जबरन कराई शादी, गर्भपात तक करवाया
युवती ने बताया कि अंबेडकरनगर में गांव के ही विनोद कुमार दुबे, गोविंद कुमार और लल्लू वर्मा उर्फ रणजीत वर्मा ने पिछले साल 20 जुलाई को अगवा किया। फिर टांडा रोड पर जोलैहा गांव के पास कांशीराम कालोनी में लल्लू के घर ले जाकर बंधक बनाकर तीन महीने तक दुष्कर्म किया।
सितंबर में तीनों एक वकील को लेकर आए और गोविंद से जबरन कोर्ट मैरिज करवा दी। इसके बाद उसे डरा-धमकाकर गोविंद के साथ उसके घर भेज दिया। कुछ दिन बाद गोविंद भाग गया तो उसके परिवारीजनों ने युवती को भी घर से भगा दिया।
युवती बीते अप्रैल में अंबेडकरनगर एसपी से शिकायत की तो पुलिस ने समझौता करा दिया। बाद में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, लेकिन न तो उसका मेडिकल करवाया और न ही कोई कार्रवाई। इससे परेशान होकर ही युवती राजधानी आई थी।
अपहरण और दुष्कर्म के वक्त नाबालिग थी युवती
पीड़िता का कहना है कि तीनों ने जब उसका अपहरण किया था, वह नाबालिग थी। तीन जून को वह 18 साल की हुई है। उसने बताया कि 10 फरवरी को एक निजी अस्पताल में उसका गर्भपात कराया गया, लेकिन पुलिस ने उचित धाराओं में एफआईआर नहीं की।