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आए थे पैसा कमाने पर लुटा बैठे लाखों

Tue, 25 Mar 2014 08:06 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी में इन दिनों नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से ठगी का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
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रविवार को गोमतीगनर के विभूति खंड में एक मामला सामने आने के बाद सोमवार को भी कैसरबाग में 25 युवक-युवतियों को ठगे जाने की घटना उजागर हुई।

कैसरबाग में कैंट रोड पर स्पार्क आउटसोर्सिंग प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली। संचालकों ने बेरोजगारों को टेलीकॉम कंपनियों में रेडियो फ्रीक्वेंसी इंजीनियर बनाने सपना दिखाया।

ट्रेनिंग के बहाने हर अभ्यर्थी से 20-20 हजार रुपये वसूलकर चंपत हो गए।

सोमवार को अभ्यर्थियों ने कैसरबाग कोतवाली जाकर कंपनी संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

कंपनी का सीईओ राजाजीपुरम के अशोकविहार सरीपुरा निवासी रिंकू शर्मा और एमडी कैसरबाग पीर जलील दक्षिण का रहने वाला आशुतोष सोनकर है।

पीजीआई परिसर निवासी चंद्र प्रकाश मिश्रा ने बताया कि उसने फरवरी में इनसे संपर्क किया था। संचालकों ने ट्रेनिंग के दौरान मानदेय और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ऑफर लेटर देने की बात कही थी।
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उसके साथ 25 अन्य युवक-युवतियों ने भी ट्रेनिंग की थी। लेकिन किसी को मानदेय नहीं दिया गया।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद जब ज्वाइनिंग की बारी आई तो युवकों ने रिंकू और आशुतोष से संपर्क किया। कुछ दिन तक ये दोनों टालते रहे।

शनिवार को युवक ऑफिस पहुंचे तो संचालक वहां नहीं मिले। फोन करने पर रिंकू ने पहले तो आत्महत्या की धमकी देकर डराने की कोशिश की।

जब एफआईआर की चेतावनी दी तो अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया। अभ्यर्थियों ने इसके बाद आशुतोष को फोन कर मानदेय मांगा।

तो वह शाम को आठ-दस लड़कों के साथ वहां आया और युवकों को वहां से भगा दिया। फिर सभी फाइलें समेटने के बाद ऑफिस में ताला लगाकर वह चंपत हो गया।

‘लड़के लाओ तभी मिलेगा पैसा’
मानदेय मांगने पर रिंकू और आशुतोष शर्मा युवकों से ट्रेनिंग के लिए और लड़के लाने को कहते थे।

जालसाजी के शिकार एक अन्य युवक सौरभ ने बताया कि उनसे पहले भी कई युवक-युवतियों ने कंपनी में ट्रेनिंग ली थी, लेकिन संचालक किसी को जॉब नहीं दिला सके।

फील्ड वर्क के नाम पर गोमतीनगर स्थित एक टेलीकॉम कंपनी के ऑफिस ले गए थे, लेकिन वहां से सबको भगा दिया गया था।

ठगी के शिकार युवकों ने बताया कि अधिक जिद करने पर संचालकों ने कुछ युवकों को चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए।

नौकरी दिलाने का दबाव बढ़ने पर इन दोनों ने एक कंसलटेंट से भी संपर्क कर युवक-युवतियों को एडजस्ट करने की बात कही लेकिन बदले में वह भी पैसा मांगने लगा।

मकान मालिक का भी रुपया मारा
कंपनी खोलकर ठगी करने वाले रिंकू शर्मा और आशुतोष सोनकर ने मकान मालिक अजय मिश्र को भी दो महीने का किराया नहीं दिया। अजय ने बताया कि आशुतोष सोनकर से हर 18,000 रुपये का एग्रीमेंट था।
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