एलयू के हॉस्टलों में अब रात आठ बजे के बाद एंट्री करना बाहरी लोगों के
लिए मुश्किल होगा।
सिर्फ हॉस्टल के स्टूडेंट्स ही उसमें आ सकेंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिला प्रशासन द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करना
शुरू कर दिया है।
इसी के तहत अब बाहरी छात्रों के प्रवेश पर बिल्कुल
प्रतिबंध रहेगा। रात आठ बजे के बाद कोई भी बाहरी व्यक्ति हॉस्टलर्स से नहीं
मिल सकेगा। इसके अलावा सभी हॉस्टलों की टूटी हुई दीवारों को मजबूत किया
जाएगा।
यही नहीं हबीबुल्लाह व महमूदाबाद हॉस्टल के पीछे टूटी चारदीवारी को
भी ठीक कर दिया जाएगा। इसके अलावा यूनिवर्सिटी अब जिला व पुलिस प्रशासन को
हॉस्टलों में रहने वाले स्टूडेंट्स का ब्यौरा भी देगी।
एलयू
के प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित कहते हैं कि उपद्रवी छात्रों के निष्कासन
की घोषणा एलयू ने सोमवार को ही छह छात्रों की पहचान होने के बाद कर दी थी।
अब इसमें अरुण कुमार, महेश और आशीष के नाम भी जोड़ दिए गए हैं, क्योंकि
पुलिस ने इनकी शिनाख्त भी उपद्रवियों के रूप में कर ली है।
अभी पुलिस
एफआईआर की कॉपी हमें देगी और इसके बाद अभी तक चिन्हित दस छात्रों का
निष्कासन कर दिया जाएगा।
विवि प्रशासन की मानें तो कुलपति डॉ. एसबी निमसे
खुद अराजक छात्रों को कैंपस से बाहर करने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश
दे रहे हैं। डॉ. निमसे किसी भी कीमत पर आम स्टूडेंट्स की पढ़ाई में खलल
नहीं पड़ने देंगे।
इधर आचार्य नरेन्द्र देव हॉस्टल के अधिकांश छात्रों के
नाम रविवार को बाबूगंज स्थित बालाजी स्वीट्स पर तोड़फोड़ व उपद्रव करने में
आने के कारण प्रश्नचिन्ह लग गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन भी कोई ठोस
कार्रवाई नहीं कर पा रहा, क्योंकि निष्कासित व निलंबित छात्रों की शरणगाह
बना आचार्य नरेन्द्र देव हॉस्टल में जैसे ही छापा मारने की रणनीति तैयार की
जाती है, छात्र पहले ही गायब हो जाते हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी व प्रशासन
की तैयारी धरी रह जाती है।