आशियाना में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के घर में हुई 50 लाख की चोरी अंतर्राज्यीय गिरोह ने की थी।
पुलिस ने बृहस्पतिवार को वारदात का खुलासा करते हुए मड़ियांव के पलटन छावनी से चार लोगों को गिरफ्तार किया है। निशानदेही पर चुराए गए माल में से पांच लाख के वारदात जेवरात व कागजात बरामद किए हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने आशियाना में ही तीन समेत 25 से अधिक वारदात कुबूली हैं। पुलिस के अनुसार गैंग यूपी, उत्तरांचल, पंजाब के चंडीगढ़ में कई वारदात अंजाम दे चुका है। पकड़े गए चोरों में तीन संभल के बनियाठेर अकलौरी के रहने वाले हैं।
सीओ कैंट बबिता सिंह के मुताबिक 20 जुलाई को चोर आशियाना के सेक्टर-एच स्थित प्रोफेसर राजीव सक्सेना के घर का ताला तोड़कर 50 लाख से अधिक का माल बटोर ले गए थे।
वारदात के समय प्रोफेसर परिवार समेत बाहर गए हुए थे। चोरों की तलाश में लगी पुलिस ने सर्विलांस सेल की मदद से छानबीन शुरू की। शक के दायरे में आए फोन नंबरों की जानकारी जुटाई गई।
पता चला कि संभल के बनियाठेर अकलौरी गांव के कुछ संदिग्ध लोग मड़ियांव के पलटन छावनी में शोभा यादव के मकान में किराए पर रह रहे हैं। साथ ही पता चला कि उक्त गांव के चार गिरोह यूपी के साथ ही उत्तरांचल, पंजाब में किराए पर रहकर रैकी के बाद वारदात कर रहे हैं।
इस जानकारी के बाद एसओ आशियाना सुधीर कुमार के नेतृत्व में हेड कांस्टेबल सुधीर अवस्थी समेत चार पुलिस कर्मियों की टीम को निगरानी पर लगाया गया। आखिरकार पुख्ता जानकारी के आधार पर चार लोगों को दबोचा गया।
पकड़े गए आरोपियों में संभल में बनियाठेर के अकरौली निवासी रियाजुल हुसैन, सोमपाल व जितेंद्र शामिल हैं। पूछताछ में जुर्म कुबूलने के साथ ही चोरी के जेवरात मुरादाबाद के बिलारी निवासी सुभाष रस्तोगी को बेचने की जानकारी दी।
सर्राफ सुभाष की दिल्ली में दुकान है। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर बड़े पैमाने पर चोरी का माल बरामद किया है। सीओ के अनुसार रियाजुल पर 13 और जितेंद्र पर पांच मुकदमे पंजीकृत हैं। सभी आरोपी कई बार जेल जा चुके हैं।
शाहखर्ची के लिए जरायम की दुनिया में कूदे
पुलिस की मानें तो पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी शाहखर्ची के लिए जरायम की दुनिया में कूदे। आरोपियों के कई युवतियों से दोस्ती है। महंगे मोबाइल, शराब व महंगे होटलों के शौक में गलत रास्ते पर चल पड़े।
चोरी का माल बेचने के बाद मिली रकम बराबर से बांट ली जाती थी। वारदात से पहले शहर में किराए पर कमरा लेते थे। रैकी के बाद माल बटोर कर फरार हो जाते थे।