जालसाजों ने आईजी-डीआईजी बनकर उनके सीयूजी फोन से न सिर्फ थानेदारों से रकम मांगी बल्कि कमिश्नर बनकर लखीमपुर के एक बीडीओ को पांच लाख रुपये खाते में जमा करने का हुक्म दिया था।
अफसरों के सीयूजी नंबर का स्पूफिंग (छद्म) कॉल में इस्तेमाल करने वाले जालसाजों का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।
पुलिस के मुताबिक, खुद को आईजी या डीआईजी बताकर सूबे के विभिन्न जिलों के थानेदारों व सीओ को सीयूजी नंबर से कॉल कर दो लाख रुपये की मांग करने वाले जालसाजों ने अन्य महकमों के अफसरों पर भी हाथ अजमाया था।
लखीमपुर खीरी के बीडीओ बांकेगंज भूषण कुमार को भी गुरुवार दोपहर ऐसी कॉल की गई थी। खुद को मंडलायुक्त संजीव सरन बताते हुए उन्हें पांच लाख रुपये एसबीआई के खाते में जमा करने का आदेश दिया।
संदेह होने पर भूषण कुमार ने खुद को अवकाश पर बताते हुए सहायक लेखाकार अवधेश तिवारी से संपर्क करने की बात कहकर फोन काटा। इसके साथ ही अन्य अफसरों को जानकारी दी। थोड़ी देर बाद जालसाज ने अवधेश तिवारी के फोन पर सीयूजी नंबर से कॉल की।
उन्हें खाता नंबर बताते हुए रकम जमा करने के आदेश के साथ कहा कि बैंक पहुंचने पर मैनेजर से बात कराएं। इस बीच अफसरों को पता चल चुका था कि मंडलायुक्त के नाम से कोई जालसाज फोन कर रहा है।
डीआईजी रेंज नवनीत सिकेरा ने बताया कि जालसाज ने पुलिस ही नहीं अन्य महकमों के अफसरों के सीयूजी नंबरों का ब्यौरा जुटाने के बाद गुरुवार को पूरे प्रदेश में थानेदार, बीडीओ व अन्य पदों पर तैनात अधिकारियों को फोन किए।
खुद को आला अफसर बताकर रकम देने का आदेश दिया। जालसाजों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। फिलहाल अभी उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।