पुलिसकर्मियों ने तीन निर्दोष रिक्शा चालकों को कच्छा बनियान गिरोह का सदस्य बताकर फर्जी इनकाउंटर कर दिया, जांच के बाद सच सामने आ गया है।
नौ साल पुराने फर्जी एनकाउंटर मामले में बुधवार को गोमतीनगर थाने के तत्कालीन एसओ सहित 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कर ली गई।
मामले की जांच कर रहे सीबी-सीआईडी के इंस्पेक्टर ने पुलिसकर्मियों को दोषी पाया था।
सितंबर 2005 में गोमतीनगर थाना की पुलिस ने गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के पास कच्छा-बनियान गिरोह के तीन बदमाशों को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था।
हालांकि, मरने वालों की शिनाख्त भी पुलिस नहीं कर सकी थी। फर्द में एसओ के साथ दो सब इंस्पेक्टर और सात कांस्टेबल शामिल थे।
बाद में कुछ सामाजिक संगठनों की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सूबे की तत्कालीन सरकार से सीबी-सीआईडी से मामले की जांच कराने की सिफारिश की थी।
शासन के आदेश पर सीबी-सीआईडी इस एनकाउंटर की जांच कर रही थी।
जांच के दौरान सीबी-सीआईडी के इंस्पेक्टर दयानाथ मिश्रा ने एनकाउंटर में मारे गए तीनों युवकों को निर्दोष पाया। वे तीनों रिक्शा चालक थे।
इंस्पेक्टर ने एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को हत्या का दोषी पाते हुए जांच रिपोर्ट तैयार की।
शुक्रवार को उन्होंने सभी दस पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए यह जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी थी।
गोमतीनगर इंस्पेक्टर अजीत सिंह चौहान ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की विवेचना सीबी-सीआईडी ही करेगी।
इनके खिलाफ हुई रिपोर्ट
गोमतीनगर थाना के तत्कालीन एसओ गाजीपुर निवासी निहाल अहमद, कौशांबी निवासी एसआई अवध किशोर शुक्ला, मेरठ निवासी एसआई एसपी सिंह, कांस्टेबल गोरखपुर के रंजीत यादव,मिर्जापुर के इंद्रजीत सिंह, बुलंदशहर के वीरेंद्र सिंह, फर्रुखाबाद के विजयपाल, बाराबंकी के देवी प्रसाद मिश्रा, अंबेडकरनगर के रामजीत और रायबरेली के जितेंद्र सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।