जेल में बंद रहकर भी सीरियल किलर भाइयों ने सियासत का सफर तय करने के लिए अपनी दबंगई से नियमों को मनमाने तरीके से तोड़ा। यहां तक कि जेल में रहते हुए ही छावनी परिषद की मतदाता सूची में अपने नाम दर्ज करा लिये हैं।
नई मतदाता सूची में तीनों भाइयों के नाम दर्ज होने से छावनी परिषद में हड़कंप मच गया। हालांकि, परिषद प्रशासन ने फिलहाल पूरे मामले पर चुप्पी साध ली है।
सीरियल किलर सलीम, रुस्तम और सोहराब का घर वार्ड संख्या छह की नई बस्ती झोपड़ पट्टी में आता है। छावनी परिषद की चुनाव नियमावली के अनुसार न्यूनतम छह माह से अधिक समय से छावनी में निवास करने वाले नागरिक का नाम ही मतदाता सूची में चढ़ाया जा सकता है।
जबकि तीनों भाई वर्ष 2005 से हत्या के मामले में लगातार जेल में बंद हैं। जुलाई 2012 में मतदाता सूची में नाम जोड़ने का सर्वे कर रही एक शिक्षिका ने तीनों भाइयों का नाम जोड़ने से मना कर दिया था।
इसके बाद सलीम की ओर से शिक्षिका को धमकी दी गई। डरी-सहमी शिक्षिका ने खुद को मतदाता सूची सर्वे की ड्यूटी से हटवा लिया। इसके बाद छावनी परिषद कार्यालय में ही तीनों भाइयों के नाम मतदाता सूची में दर्ज करा दिए गए।
इस वर्ष फिर से जब मतदाता सूची बनी तो बिना किसी सर्वे के ही तीनों सीरियल किलर भाइयों के नाम फिर से शामिल कर दिए गए। सीरियल किलर के खौफ के कारण मतदाता सूची में उनके दर्ज नाम पर एक भी नागरिक या जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति तक दर्ज नहीं करायी।
सूत्र बताते हैं कि सीरियल किलर में सलीम खुद और अपनी पत्नी अंजुम को दिसंबर में प्रस्तावित छावनी परिषद के आम चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहा है। पप्पू पांडे की हत्या कर पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने के संकेत दिए हैं, वहीं पास ही के एक वार्ड से सलीम खुद चुनाव मैदान में उतरना चाह रहा है।