पांच वर्ष में धन दोगुना कर प्रतिमाह साढ़े चार करोड़ रुपये की रकम जमा कराने वाली बैंकिंग कंपनी ‘प्रोग्रेस ग्रुप’ की अकबरपुर शाखा पर प्रशासन ने बुधवार को छापा मारा।
इस कंपनी में लगभग 30 हजार लोगों ने निवेश कर रखा है।
डीएम के निर्देश पर शाखा पहुंचे एसडीएम व सीओ आवश्यक कार्रवाई करने के बाद शाखा प्रबंधक को अपने साथ कलेक्ट्रेट ले गए। जहां जिलाधिकारी विवेक ने उनसे गहन पूछताछ की।
संतोषजनक जवाब न होने पर शाखा प्रबंधक को कलेक्ट्रेट में ही रोक लिया और पूरे मामले की गहनता से जांच करने के लिए एडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम गठित कर दी।
डीएम ने बंगलौर में मौजूद कंपनी के निदेशक को भी तत्काल जिले में पहुंचने का निर्देश दिया है।
कुछ दिनों पूर्व ही जिले में कार्यरत एक बैंकिंग एजेंसी ‘रैमल इंडस्ट्रीज’ लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गई थी।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद महरुआ में शाखा प्रबंधक गिरफ्तार भी हुआ, लेकिन इसके बाद से पुलिस की जांच सुस्त पड़ी हुई है।
इस बीच जिलाधिकारी विवेक के संज्ञान में मामला लाया गया कि एक और बैंकिंग एजेंसी जिले में कार्य कर रही है, जो कभी भी फरार हो सकती है।
इस पर डीएम ने एसडीएम सदर सोमदत्त मौर्य और सीओ सिटी राजेश सिंह को निर्देश दिया कि वे अकबरपुर शाखा में छापा मारें और शाखा प्रबंधक को उनके सामने पेश करें।
इसके बाद दोनों अधिकारी शाखा पहुंच गए और वहां आवश्यक कार्रवाई करने के बाद शाखा प्रबंधक सुनील प्रसाद को अपने साथ कलेक्ट्रेट ले गए।
वहां डीएम ने शाखा प्रबंधक से उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
संतोषजनक जवाब न मिलने पर डीएम ने एडीएम राममूर्ति मिश्र, वरिष्ठ कोषाधिकारी आरपी सिंह, लीड बैंक प्रबंधक एके शुक्ल व जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक समेत एसडीएम सदर की टीम गठित कर गहनता से पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया।
डीएम के समक्ष ही शाखा प्रबंधक ने बताया कि वर्ष 2009 से उनकी संस्था यहां काम कर रही है। उनकी संस्था बिहार में पंजीकृत है।
पश्चिम बंगाल में लगभग 100 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली जूस फैक्ट्री में निवेश के लिए रकम जमा कराई जा रही है।
वे सब पांच वर्ष में रकम दोगुना करते हैं। बीते कुछ समय से प्रति माह लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं।
एसडीएम सदर सोमदत्त मौर्य ने बताया कि जिलाधिकारी विवेक ने बंगलौर में मौजूद कंपनी के निदेशक विकास हाटलेडकर को तत्काल अंबेडकरनगर पहुंचने को कहा है।
एसडीएम के मुताबिक जांच का दायरा यह है कि आखिर किन परिस्थितियों में पांच वर्ष के भीतर रकम दूनी किए जाने का वादा किया जा रहा है।
यह भी जांच का बिंदु है कि बिहार की जिस कंपनी में पैसा जमा होता है, उसका काम क्या है।
रिजर्व बैंक से यह जानकारी प्राप्त की जा रही है कि प्रोग्रेस ग्रुप को इस प्रकार के कार्यों की अनुमति प्राप्त है या नहीं।
इसके अलावा संस्था के इनकम टैक्स रिटर्न, मूल रजिस्ट्रेशन की जानकारी के साथ ही कारपोरेट आईडी का कन्फर्मेंशन कराया जाना है।
एसडीएम ने बताया कि फिलहाल जांच पूरी होने तक शाखा प्रबंधक को कलेक्ट्रेट में ही रोक लिया गया है।
एसडीएम के मुताबिक लगभग 75 करोड़ रुपये जमा होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है।