कंपनी का रजिस्ट्रेशन मुंबई के कांदिवली निवासी शत्रुघन तहसीलदार सिंह ने फरवरी 2013 में कराया था। मार्च 2017 में कंपनी ने विभूतिखंड के साइबर हाइट्स के तृतीय तल पर हेड ऑफिस बनाकर ठगी का धंधा शुरू किया। शत्रुघन ने भोजपुरी अभिनेत्री अर्पिता माली से संपर्क कर 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर निदेशक बनाने का ऑफर दिया। अर्पिता कंपनी की निदेशक बन गईं।
कंपनी ने उनके हस्ताक्षर से ही विभूतिखंड स्थित इंडसइंड व एक्सिस बैंक, इंदिरानगर की बैंक ऑफ इंडिया और एसबीआई की गोमतीनगर वसुंधरा शाखा में अकाउंट खुलवाए। अकाउंट खुलने के कुछ दिन बाद से ही लाखों रुपये उसमें जमा होने लगे। इस बीच शत्रुघन ने पूर्व मिस जम्मू अनारा गुप्ता और पानीपत के नरेश कुमार को भी कंपनी से जोड़ लिया और उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, गुजरात और हरियाणा में अपनी 30 से अधिक शाखाएं खोल लीं।
कंपनी के सीईओ शत्रुघन ने कुछ महीने बाद ही अर्पिता माली को निदेशक के पद से हटा दिया। अर्पिता ने भी कंपनी के निदेशकों पर पांजी स्कीम चलाने की सेबी व विभूतिखंड पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। निदेशकों के बीच आपस में भी कई विवाद सामने आए। नवंबर 2017 में कंपनी अपना ऑफिस बंद करके भाग गई।
अनारा गुप्ता के खिलाफ विभूतिखंड थाना में पहले भी एक केस दर्ज है। यह केस 30 नवंबर 2017 को फैजाबाद के अखंड सिंह ने दर्ज कराया था। उन्होंने अनारा के अलावा सीईओ शत्रुघन टी सिंह, सीएमडी नरेश कुमार व सेल्स अफसर प्रदीप कुमार को नामजद किया था। हालांकि, इस केस के दर्ज होने से पहले ही इलाहाबाद पुलिस ने कंपनी के सीईओ शत्रुघन टी सिंह को गिरफ्तार कर इम्परर कंपनी का साइबर हाइट्स स्थित ऑफिस सील कर दिया था। पुलिस ने अनारा को पूछताछ के लिए वारंट भेजने की बात कही थी। पुलिस ने कंपनी के ऑफिस से लैपटॉप व कंप्यूटर जब्त किए थे, लेकिन इनकी भी जांच आगे नहीं बढ़ सकी।