श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में आठ दिन तक जीवन-मौत से जूझने के बाद तेजाब से झुलसी गर्भवती गुलफ्शा (22) ने रविवार को दम तोड़ दिया। डॉक्टरों की कोशिशें और सैकड़ों लोगों की दुआएं भी काम नहीं आ सकीं। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
हजरतगंज की नबीउल्ला रोड निवासी बादशाह की पत्नी गुलफ्शा को ससुराल वाले दहेज को लेकर प्रताड़ित करते थे। आरोप है कि आठ मार्च को बादशाह के काम पर जाने के बाद सास खैरुलनिशा,ननद अंजुम,नंदोई मेराज और देवर जमीर ने मिलकर पीटा।
इतना ही नहीं विरोध करने पर तेजाब से नहला दिया। चेहरा,गर्दन,पीठ,पेट व हाथों का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह झुलस गया। गंभीर हालत में उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हजरतगंज पुलिस ने नौ मार्च को ही पति सहित पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अस्पताल में भर्ती गुलफ्शा जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी। परिवार के लोग सलामती के लिए मंदिर, मस्जिद में दुआएं कर रहे थे, तो डॉक्टरों ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार को उसने दम तोड़ दिया।
चिकित्सकों के मुताबिक,गुलफ्शा साठ प्रतिशत जल चुकी थी। उपचार के लिए कहीं और शिफ्ट नहीं किया जा सकता था। इंस्पेक्टर हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि तेजाब फेंकने वाले सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज जा चुका है।