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जिसे यूपी पुलिस ने 'मारा', जिंदा निकली वो महिला!

Sun, 15 Feb 2015 02:21 AM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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कृष्णानगर में छह महीने पहले फैजाबाद की जिस सुनीता सोनी (38) की हत्या की बात कही जा रही थी, वह शनिवार सुबह अपने गांव नसरतपुर पहुंच गई। उसके भाई संदीप ने गांव के ही संजय शर्मा और गुलाबा देवी के खिलाफ फैजाबाद के तारुन थाना में अपहरण की एफआईआर लिखाई थी।
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सुबह करीब दस बजे कंधे पर बैग टांगकर कमला विकासनगर बाजार में टहल रही सुनीता को देखते ही हड़कंप मच गया। पुलिस सुनीता और उसकी मां सूरसती से पूछताछ कर रही है। उधर, सुनीता जिंदा है तो मरने वाली कौन थी?

इस सवाल ने कृष्णानगर पुलिस को उलझा दिया है। थाना प्रभारी सुनील दत्त कौल का कहना है कि छह महीने पुरानी घटना की अब नये सिरे से छानबीन की जाएगी।

थाना प्रभारी कौल ने बताया कि बीती पांच सितंबर को लालाखेड़ा रामदासखेड़ा गांव के बीच रेलवे ट्रैक पर हत्या करके फेंका गया अज्ञात महिला का शव मिला था। मृतका के चेहरे से सिर तक धारदार हथियार से काटे जाने का गहरा निशान था। चेहरा भी कुचला हुआ था। पुलिस ने शिनाख्त के लिए 72 घंटे इंतजार किया लेकिन कोई नहीं आया तब पोस्टमार्टम कराया गया।
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दस दिन बाद 15 सितंबर को फैजाबाद के तारुन थाना क्षेत्र के नसरतपुर गांव निवासी संदीप सोनी कृष्णानगर कोतवाली पहुंचे और फोटो व कपड़ों से मृतका की शिनाख्त अपनी लापता बहन सुनीता के रूप में की। संदीप के साथ परिवार व गांव के लोगों ने भी शव पहचाना था।

नए सिरे से होगी जांच, पर नहीं है जवाब

कृष्णानगर पुलिस का कहना है कि शिनाख्त होने के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य साक्ष्य फैजाबाद पुलिस के सुपुर्द कर दिए गए थे। मामला खत्म हो चुका था कि शनिवार को सुनीता अपने गांव पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक सुनीता की हत्या की जानकारी के बाद तारुन थाना की पुलिस ने दबाव बनाया तो आरोपी संजय शर्मा कोर्ट में आत्मसमर्पण कर जेल चला गया जबकि दूसरी आरोपी गुलाबा देवी फरार चल रही है।

उधर, कृष्णानगर पुलिस के सामने अज्ञात महिला की शिनाख्त की चुनौती खड़ी हो गई है। थाना प्रभारी का कहना है कि अब हत्या करके अज्ञात महिला का शव फेंकने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके शिनाख्त की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हत्या के कारणों की भी पड़ताल कराई जाएगी।

एसओ ने कहा कि महिला के शव के पोस्टर बनवाकर फिर से रेलवे और बस अड्डों सहित अन्य भीड़ वाले स्थानों पर लगवाए जाएंगे। अज्ञात शव के डीएनए जांच के लिए सैंपल सुरक्षित रखे हैं। कोई वारिस या दावेदार आता है तो परीक्षण कराया जाएगा।

क्यों नहीं लिखी हत्या व साक्ष्य छिपाने की एफआईआर
अज्ञात शव मिलने पर हत्या और साक्ष्य छिपाने की एफआईआर न लिखने पर कृष्णानगर पुलिस कठघरे में है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पांच सितंबर को शव मिला लेकिन शिनाख्त नहीं हुई। लेकिन संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस ने ऐसा क्यों किया? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

यहां देखें पूरा मामला, तब पुलिस ने की थी लापरवाही

नसरतपुर गांव के नंदलाल की बेटी सुनीता 14 अप्रैल 2014 की शाम गांव से लापता हो गई थी। घटना के वक्त उसकी मां सूरसती इलाज कराने के लिए दिल्ली में बेटे संदीप के पास गई थी। लौटकर उन्होंने पुत्री की काफी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं लगा।

परिवारीजन एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे तो पुलिस ने टरका दिया। बाद में संदीप ने कोर्ट के आदेश पर संजय और गुलाबा के खिलाफ तारुन थाना में रिपोर्ट लिखाई। इस बीच पांच सितंबर को कृष्णानगर थाना क्षेत्र में एक महिला का क्षत-विक्षत शव मिलने का इश्तिहार पढ़कर परिवारीजन कृष्णानगर कोतवाली पहुंचे और शिनाख्त की।

बैग टांगे सुनीता को देख चौंक गए लोग
सुनीता को शनिवार सुबह कंधे पर एक बैग टांगे फैजाबाद के कमला विकास नगर बाजार में घूमते देख लोग चौंक गए। लोगों को अपनी आंखों पर यकीन नहीं आया। कुछ लोगों ने उसका नाम भी पुकारा तो सुनीता ने मुड़कर देखा तब लोगों को यकीन आ गया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर आ गई। अवकाश पर चल रहे तारुन थाना प्रभारी दीपचंद सहित अधिकारियों को जानकारी दी गई। थाने का पूरा स्टाफ सुनीता की तलाश में गांव पहुंच गया और उसे व सूरसती को हिरासत में ले लिया।

परिवारीजन के साथ दर्जी भी शिनाख्त में खा गए गच्चा
समाचार पत्र में शिनाख्त का इश्तहार छपने के बाद सुरसती व उसके बेटे संदीप ने फोटो व कपड़े के आधार पर शव की शिनाख्त सुनीता के रूप में की थी। कृष्णानगर पुलिस ने संशय को टालने के लिए नसरतपुर गांव के प्रधान तथा सुनीता का कपड़ा सिलने वाले दर्जी को भी बुलवाया। लखनऊ गए प्रधान रामकेवल, पूर्व प्रधान साईलाल तथा सुनीता का कपड़ा सिलने वाले दर्जी मुसीबत अली ने भी इस पर मोहर लगाई।

टूट चुकी है सुनीता की दो शादियां

सुनीता का विवाह वर्ष 1995 में सुलतानपुर के वल्दीराय थाना क्षेत्र निवासी बसंत लाल के साथ किया था। संतान न होने पर दोनों अलग हो गए और सुनीता मायके आ गई। कुछ महीने बाद जौनपुर जनपद के खेतासराय निवासी सुभाष के साथ उसकी शादी कराई गई लेकिन यहां भी संतान न होने पर पति ने उसे छोड़ दिया।

राजधानी के निजी नर्सिंग होम में कर रही थी नौकरी
रहस्यमय हालात में घर से लापता सुनीता सूबे की राजधानी में ही एक निजी नर्सिंग होम में नौकरी कर रही थी। उसने पुलिस की पूछताछ में यह जानकारी दी। तारुन थाना प्रभारी दीपचंद का कहना है कि सुनीता किस नर्सिंगहोम में थी, यह पता लगाने के लिए पुलिस से संपर्क किया गया है। उसे गायब करने में संजय व गुलाबा की क्या भूमिका है? कहीं इस मामले के पीछे कोई साजिश तो नहीं है? यह पता लगाया जा रहा है।

साजिश के तहत फंसाने का आरोप
सुनीता के सकुशल लौटने के बाद आरोपी संजय व गुलाबा के परिवारीजनों में खुशी की लहर है। उन्होंने फर्जी फंसाने का आरोप लगाते हुए आक्रोश जताया। मंडल कारागार में निरूद्ध संजय शर्मा की मां राजकुमारी का कहना है कि सुरसती ने पुराने विवाद को लेकर उसे फर्जी मामले में फंसाया। लड़की को गायब करने की साजिश उसी ने रची होगी। बिना अपराध बेटा जेल चला गया। वहीं मामले में फरार आरोपी गुलाबा देवी के भाई बब्बन का कहना है कि साजिश के चलते परिवार बीते दस माह से मानसिक प्रताड़ना झेल रहा है।
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तारुन पुलिस खुश, कृष्णानगर की मुसीबत

सुनीता के जिंदा घर लौटने से तारुन पुलिस उत्साहित है तो कृष्णानगर पुलिस के लिए यह खबर किसी मुसीबत से कम नहीं है। तारुन थाना की पुलिस का कहना है कि अपहरण के मामले से पर्दा उठ गया है। सुनीता के बयान दर्ज करने के बाद हो सकता है कि संजय शर्मा और गुलाबा देवी के खिलाफ दर्ज मामला खत्म हो जाए।

उधर, कृष्णानगर पुलिस के सामने अज्ञात शव की शिनाख्त चुनौती बन गया है। मृतका को सुनीता मानकर पुलिस शांत बैठ गई थी। थाना प्रभारी कौल का कहना है कि अब फिर से मृतका के पोस्टर छपवाकर बस अड्डे व रेलवे स्टेशन सहित अन्य भीड़ वाली जगहों पर लगवाए जाएंगे।

इसके साथ ही तारुन पुलिस से संपर्क करके यह पता लगाया जाएगा कि सुनीता यहां किसके साथ, कहां रहती थी और क्या काम करती थी?
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