माज हत्याकांड के मास्टर माइंड बर्खास्त इंस्पेक्टर संजय राय के सधे अंदाज के आगे पुलिस के धुरंधर हार गए।
कोर्ट ने 72 घंटे का पुलिस कस्टडी रिमांड दिया था लेकिन खीझी पुलिस ने उसे 36 वें घंटे में ही शनिवार रात जेल पहुंचा दिया।
हालांकि, पुलिस ने संजय से पूछताछ में अहम जानकारी उगलवाने का दावा किया है।
माज हत्याकांड के खुलासे के दौरान नौ जून को पुलिस अफसरों ने जिस जोशोखरोश से इंस्पेक्टर संजय राय को मास्टर माइंड करार देते हुए उसे निलंबित करने के साथ तलाश शुरू की थी। पुलिस के धुरंधरों को उसने सिर्फ 36 घंटे में शिकस्त दे दी।
प्रशिक्षु दरोगा से संबंध, माज हत्याकांड, आजमगढ़ जेल के उम्रकैदी संदीप राय से रिश्ते और शूटरों से संबंध, शंघाई की युवतियों को फाइव स्टार होटल में ठहराने आदि से जुड़े तीन सौ से अधिक सवालों का उसने अपने अंदाज में ही जवाब दिया।
अन्य सवालों पर चुप्पी साधी या फिर घुमा दिया। पुलिस के धुरंधर इस कदर खीझे कि 72 घंटे के रिमांड की अवधि पूरी करने के बजाय 36 घंटे में ही डॉक्टरी मुआयना करा शनिवार रात 10 बजे उसे जेल पहुंचा दिया।
विगत दिनों बंदियों द्वारा उस पर हमले को लेकर कोर्ट के आदेश पर जेल प्रशासन ने उसे हाई सिक्टोरिटी बैरक से भी अधिक सुरक्षित बैरक में रखा है।
हत्याकांड की तफ्तीश कर रहे एसओ इंदिरानगर रमेश चंद्र यादव का दावा है कि संजय ने अहम जानकारी दी है। उसने माना कि हत्याकांड से पहले नौकर छोटू के माध्यम से शूटरों को 20 हजार रुपये दिए थे।
आजमगढ़ जेल के उम्रकैदी संदीप राय से अपने रिश्ते कुबूले। शूटरों के ठहरने व अपने भाई की कार इस्तेमाल होने की बात स्वीकारी है। उसके मोबाइल के कॉल डिटेल, वायस रिकार्डिंग, नौकर के बयान समेत पुलिस के पास अनेक ठोस सबूत हैं, जिनके चलते वह सजा से बच नहीं सकता।
ढूंढे नहीं मिले मास्टर माइंड की कहानी के छेद
माज हत्याकांड में बर्खास्त इंस्पेक्टर संजय राय से 36 घंटे की पूछताछ में पुलिस उसकी कहानी के छेद ढूंढने में नाकाम रही। संजय राय ने माना कि प्रशिक्षु दरोगा व उसके परिवार से करीबी रिश्ते थे। उम्रकैदी संदीप राय से संबंध हैं लेकिन उनका अपराधियों को पकड़ने में इस्तेमाल करता था।
नौकर छोटू को परिवार के सदस्य जैसा मानता था। वह न सिर्फ उसकी गाड़ी लेकर घूमता था, बल्कि मोबाइल भी इस्तेमाल करता था। संजय राय का कहना है कि विश्वासघाती नौकर ने एकाध बार उसके फोन से अपराधियों से बात की, जबकि ज्यादा बातचीत उसने अपने मोबाइल से की थी।
माज की हत्या या तो छोटू ने शूटरों को बुलाकर कराई या फिर परिचित शूटरों के इरादे से खुद भी अनजान था। संभव है कि किसी अन्य व्यक्ति के बुलावे पर आए शूटरों ने छोटू को साथ ले लिया हो।
खुद को महकमे के प्रति वफादार व देशभक्त बताते हुए संजय राय ने कहा कि उसके खिलाफ भयानक साजिश रचकर फंसाया गया। इस साजिश में नौकर छोटू शामिल था या फिर उसे इस्तेमाल किया गया है। प्रशिक्षु दरोगा व उसके मित्र अकमल का मोबाइल सर्विलांस पर लेने को भी उसने एक ऑपरेशन बताया।
‘जय हिंद’ जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे
इंदिरानगर थाने से जेल के लिए रवाना होते समय संजय राय ने ‘जय हिंद’ बोलते हुए पुलिसकर्मियों से विदा ली और कहा कि जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे।
उसके अंदाज ने पूछताछ करने वाली टीम को विचलित कर दिया। एक अधिकारी ने दबी जुबान से माना कि उसे सजा दिला पाना काफी मुश्किल होगा। पुलिस के तर्क व सबूत कोर्ट में कितने टिकते हैं यह वक्त ही बताएगा।