विधानसभा की याचिका समिति और रेरा की सख्ती से काम तो शुरू हुए, लेकिन अब भी तेजी नहीं
लखनऊ। अंसल की सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप में हुए फ्रॉड के मामले में अलग-अलग संस्थाओं ने जांच और कार्रवाई शुरू की। इसके बावजूद पूरी तरह आवंटियों को राहत नहीं मिल पाई है। विधानसभा की याचिका समिति, एलडीए और रेरा की सख्ती के बाद काम भले ही प्रोजेक्टों पर शुरू हुआ हो। लेकिन आवंटियों को दो साल में राहत नहीं मिल पाई। आवंटी अब भी भूखंड या रिफंड पाने को भटक रहे हैं।
अंसल समूह की 6500 एकड़ की इस हाईटेक टाउनशिप में अधूरे पड़े बहुमंजिला और भूखंड व विला के प्रोजेक्टों को पूरा कराने या इसकी प्रगति को तेज करने में कोई सफलता नहीं मिल पाई है। आवंटियों के मुताबिक, मीडिया एन्क्लेव, पैराडाइज डायमंड, ओलंपस लेक, सेक्टर एन में विला, जीवन एन्क्लेव आदि में काम ही पूरे नहीं कराए जा रहे हैं। इसके उलट आवंटियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि मौजूदा कीमत पर अंसल में ही निजी बिल्डरों के प्रोजेक्टों में समायोजन करा लें। इसमें आवंटियों का जमा पैसा समायोजित हो जाएगा। इसके बावजूद नुकसान में आवंटी ही बने हुए हैं। सालों की घर की उम्मीद में बैठे आवंटी खुद का नुकसान मानते हुए इस ऑफर को भी स्वीकार कर रहे हैं।
इन संस्थाओं की दो साल में हुई जांच
- विधानसभा की याचिका समिति की उपसमिति की जांच
- आवास राज्यमंत्री सुरेश पासी का निरीक्षण व जांच
- कानपुर विकास प्राधिकरण के वीसी की तकनीकी जांच
इन दो संस्थाओं से हुई कार्रवाई
- एलडीए ने जमीन बंधक बनाने के लिए रजिस्टर्ड अनुबंध कराना शुरू किए
- रेरा ने 91 प्रोजेक्टों के फोरेंसिक ऑडिट का आदेश कर टाउनशिप की निगरानी शुरू की
सिर्फ गड़बड़ियां ही मिलीं
कानपुर विकास प्राधिकरण और विधानसभा की याचिका समिति की उपसमिति की जांच में अंसल में खामियां ही मिलीं। जहां 311 एकड़ बंधक जमीन बिना एलडीए से अनुमति लिए बेच दी गई। वहीं, हाईटेक टाउनशिप की शर्तों को पूरा करने के लिए ईडब्ल्यूएस व एलआईजी आवास बनाए ही नहीं गए। कई साल बाद भी छह हजार से अधिक आवंटी अपनी खरीदी हुई संपत्तियों पर कब्जा पाने को भटक रहे हैं।
रेरा ही आवंटियों की आखिरी उम्मीद
आवंटी एसके घोष का कहना है कि रेरा ही आवंटियों की आखिरी उम्मीद है। हालांकि, रेरा के आदेशों का भी अनुपालन कर रिफंड या कब्जा देने की कार्रवाई बिल्डर नहीं करा रहा है। ऐसे में डेडलाइन के बाद रेरा से ही अपील करनी होगी।