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दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के मुख्य आरोपी को 20 साल की सजा

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गोंडा। नाबालिग बालिका को शादी का झांसा देकर अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तीन साल पुराने मुकदमे में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट चंद्र मोहन चतुर्वेदी ने आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड तथा एक महिला को तीन साल का कारावास और छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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पॉक्सो एक्ट के विशेष लोक अभियोजक अशोक कुमार सिंह और सुनील कुमार मिश्र ने बताया कि 17 जुलाई 2014 को बाराबंकी जनपद के एक व्यक्ति ने परसपुर थाने में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि उसकी 15 वर्षीय बेटी को शादी का झांसा देकर व बहला फुसलाकर मोनू उर्फ महेंद्र गुप्ता निवासी बेलसर रोड कस्बा व थाना परसपुर भगा लाया है। वादी ने पुष्पा नाम की महिला पर भी सहयोग करने का आरोप लगाया। वादी के तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर आरोपी मोनू उर्फ महेंद्र गुप्ता व पुष्पा के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
विचारण के दौरान न्यायालय ने आरोपियों के विरुद्ध शादी का झांसा देकर बालिका का अपहरण व दुष्कर्म व बालकों का संरक्षण अधिनियम, पॉक्सो एक्ट अपराध का पुख्ता सबूत मिलने पर दोष सिद्ध किया। इस मामले में निर्णय देते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट चंद्र मोहन चतुर्वेदी ने आरोपी मोनू उर्फ महेंद्र गुप्ता दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के अपराध में 20 साल सश्रम कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड और आरोपी की सहयोगी पुष्पा को तीन साल का कारावास व छह हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।
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