राममंदिर के लिए अयोध्या में भूमि पूजन के बाद महज तीन दिन में 24 करोड़ रुपये दान आया। जबकि पहले चार माह में करीब छह करोड़ रुपये दान में मिले थे। चांदी की ईंटें व बहुमूल्य उपहार मिलने पर दान की राशि काफी बढ़ जाती है। वहीं, कॉरपोरेट सेक्टर भी खजाना खोलने को बेताब है।
इनमें अंबानी, अडानी समेत कई समूह शामिल हैं, जो कॉलोनी, पार्क, गुरुकुल और सेवा क्षेत्र में निवेश करना चाहते हैं। डीएम अनुज कुमार झा बताते हैं कि तमाम समूह सरकार से सिर्फ भूमि चाहते हैं और उसे विकसित करने से लेकर अन्य कार्य खुद करना चाहते हैं।
कई बड़े कॉरपोरेट घराने सरकार के समक्ष मंशा भी जता चुके हैं कि स्वामीनारायण जन्मस्थली छपिया से उनकी रमण भूमि अयोध्या तक 35 किमी कॉरिडोर बनाने की अनुमति दी जाए। वे इसके किनारे पांच सितारा होटल, प्लाजा, रिहायशी आधुनिक सुविधायुक्त कॉलोनी, पार्क समेत आध्यात्मिक केंद्र विकसित करना चाहते हैं।
अयोध्या अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ एवं अनंतनाथ के रूप में चार अन्य जैन तीर्थंकरों की भूमि के रूप में प्रतिष्ठित है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में जैन मतावलंबी भी अयोध्या आते हैं। तमाम कॉरपोरेट घराने से लेकर अप्रवासी तक चार्टर प्लेन से आते रहते हैं। पर, वे लखनऊ या वाराणसी में ही रुकना पसंद करते थे। अब बदले माहौल में वे सरयू किनारे शांत व सुखदायक माहौल में रुक सकेंगे।
वाहे गुरु की तपस्थली भी सजेगी
सिखों के प्रथम, नवम एवं दशम गुरु समय-समय पर अयोध्या आए और इसके प्रति आस्था निवेदित की। राममंदिर आंदोलन में सिख समाज का बड़ा योगदान रहा है। गुरुद्वारा ब्रह्माकुंड एवं गुरुद्वारा गोविंद धाम के रूप में सिख परंपरा की विरासत बदले माहौल में लोगों को आकर्षित करेगी।
भगवान बुद्ध से भी जुड़ सकता है पर्यटन
कहा जाता है कि भगवान बुद्ध की प्रमुख उपासिका विशाखा ने उनके सान्निध्य में अयोध्या में धम्म की दीक्षा ली थी। इसी के स्मृति स्वरूप विशाखा ने अयोध्या में मणि पर्वत के समीप बौद्ध विहार की स्थापना करवाई थी। यह भी बताया जाता है कि बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद इसी विहार में भगवान बुद्ध के दांत रखे गए थे। ऐसे शोधों से देश-विदेश के मतावलंबियों को जोड़ा गया तो यह वाराणसी, गया, कुशीनगर, लुंबिनी जैसा बड़ा केंद्र बन सकता है।
375 किलोमीटर लंबा राम वन गमन पथ बनेगा
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने अयोध्या में मंदिर निर्माण का साढ़े तीन साल में हर हाल में बनाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, उससे पहले केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना के तहत भगवान राम 14 वर्षों तक जिन रास्तों से वनवास के दौरान गुजरे थे, वहां 375 किलोमीटर रामवन गमन पथ तैयार किया जाएगा। इस पथ पर श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थल को विकसित किया जाएगा। अयोध्या से चित्रकूट, मध्य प्रदेश के बीच राम वन गमन पथ का लगभग 90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। 2021 तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित है।