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लखनऊ: राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य भारत को नॉलेज पावर बनाना

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लखनऊ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 2020 में जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) बनी, तो इसे बनाने के पीछे लक्ष्य था भारत को नॉलेज पॉवर बनाना। इसके लिए एनईपी में पाठ्यक्रम को लचीला और रोजगारपरक बनाया गया। देश इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईको सिस्टम बन चुका है। विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थानों को इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए और छात्र-छात्राओं को नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के लिए प्रेरित करना चाहिए।
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राष्ट्रपति सोमवार को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के 10वें दीक्षांत समारोह में संबोधित कर रही थीं। उन्हाेंने मेधावियों को मेडल देकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आकर लगा कि देश में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है और अनुकूल वातावरण बन रहा है। छात्र और शिक्षक इस अनुकूल वातावरण को शिक्षा से जोड़ें। नए अनुसंधान करें। शैक्षिक संस्थान नए माहौल में चौथी औद्योगिक क्रांति और इंक्यूबेेशन सेंटर के हब बनें। यह खुशी की बात होगी कि बीबीएयू भी नई क्रांति का वाहक बने और सामाजिक उन्नति व समानता का बनाए। छात्र अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करें और देश को विकास के पथ पर ले जाएं। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण, कुलाधिपति डॉ. प्रकाश सी बरतूनिया, कुलपति प्रो. संजय सिंह मौजूद रहे।
बिरसा मुंडा छात्र गतिविधि केंद्र का लोकार्पण
राष्ट्रपति ने बीबीएयू में बिरसा मुंडा छात्र गतिविधि केंद्र का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। यह केंद्र युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए काम करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा के मूल में शिक्षक हैं। अच्छे अफसरों व उद्यमियों के साथ देश को अच्छे शिक्षकों की भी जरूरत है। शिक्षकों की बेहतरी के लिए भी काम होना चाहिए।
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कहा, डॉ. आंबेडकर मेरे भगवान
राष्ट्रपति ने कहा कि हर्ष का विषय है कि मैं उस विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हूं जोकि डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर है। डॉ. आंबेडकर मेरे लिए भगवान के समान हैं। उन्होंने कुछ ऐसा किया था जिसकी वजह से ही मैं यहां आपके सामने खड़ी हूं। डॉ. आंबेडकर मानते थे कि विश्वविद्यालयों का यह मूल कर्तव्य है कि गरीब और जरूरतमंदों को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा दें। उन्होंने भरोसा जताया कि बीबीएयू में इस वर्ग के लिए शिक्षा के प्रसार का होता रहेगा। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के जीवन मूल्य और उनके संघर्षों से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने बेटियों को सराहा
राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे बताया गया है कि दीक्षांत समारोह में डिग्री पाने वालों में 42 फीसदी लड़कियां हैं। वहीं मेडल विजेताओं में 60 फीसदी लड़कियों को मिले हैं। कहा कि मैं इन बेटियों की विशेष सराहना करती हूं।
कविता के जरिए दी प्रेरणा
राष्ट्रपति ने कहा कि इस मौके पर मुझे राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की एक कविता याद आती है। ‘नहीं विघभन-बाधाओं को हम, स्वयं बुलाने जाते हैं, फिर भी खुद से आ जाएं तो, कभी नहीं घबड़ाते हैं’। यह कविता हमको प्रेरणा देती है। जब भी संकट आए, समाधान तलाशें। इसे एक संभावना के रूप में देखें। यह आपके व्यक्तित्व को भी निखारेगा।
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