तिरुपति बालाजी मंदिर में बंटने वाले प्रसाद के लड्डू पहली बार विवाद में नहीं आए हैं। इनकी गुणवत्ता पर करीब चार दशक से सवाल उठते रहे हैं। अमर उजाला में 8 सितंबर 1985 को 'तिरुपति मंदिर के प्रसाद के लड्डू अब वैज्ञानिक पद्धति से बनाए जाएंगे' शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी।
अमर उजाला की खबर के मुताबिक, तिरुपति के लड्डू की गुणवत्ता पर विवाद खड़ा होने के बाद फैसला लिया गया कि अब इन्हें केंद्रीय तकनीकी अनुसंधान संस्थान की देखरेख में बनाया जाएगा। संस्थान लड्डुओं को तैयार कराने में 1979 से मदद कर रहा था। लेकिन, ये पहला मौका था जब संस्थान को इनकी गुणवत्ता परखेगा का निर्देश भी दिया गया।
लखनऊ के श्रद्धालु ने की थी शिकायत
लड्डुओं की गुणवत्ता पर छपी खबरों के बाद आंध्र प्रदेश विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ था। तब लखनऊ के एक अवकाश प्राप्त अधिकारी ने अखबार को बताया था कि उन्होंने जो लड्डू खरीदे, उनमें फफूंदी और एक कील निकली थी। यह खबर प्रकाशित होने के बाद ही मामला सामने आया और आंध्र विधानसभा में हंगामा हुआ।
घी पर भी विधानसभा में हुई बहस
तब लड्डुओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले घी पर भी आंध्र विधानसभा में बहस हुई थी। तब आंध्र प्रदेश दुग्ध महासंघ से 42 रुपये प्रति किग्रा की दर पर घी खरीदा जाता था। विवाद के बाद भी आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम एनटी रामाराव ने लड्डुओं के लिए घी महासंघ से ही खरीदने का आदेश दे दिया। हालांकि, मंदिर ने 18 कर्मचारियों को काम से हटा दिया था। इसके बाद कई बार लड्डुओं और घी को लेकर विवाद हुआ।