रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विस्तार को लेकर एक और बाधा खत्म हो गई है। रायबरेली विकास प्राधिकरण की महायोजना-2031 में एम्स की 100 एकड़ जमीन के भू प्रयोग को सामुदायिक घोषित कर दिया गया है। ऐसा होने के बाद एम्स परिसर में किसी भी निर्माण को आरडीए से आसानी से वैधता प्रमाणपत्र जारी हो सकेगा।
नियमानुसार किसी भी हॉस्पिटल के लिए जमीन का भू प्रयोग सामुदायिक श्रेणी में होना अनिवार्य है। पुरानी महायोजना में एम्स की जमीन के कृषि योग्य होने के कारण भवनों को वैध करने में बाधा आ रही थी।
रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) की महायोजना-2031 के पास होने के बाद एक ओर जहां शहर के व्यावसायियों को बड़ा फायदा हुआ है, वहीं एम्स को भी राहत मिली है। नियमानुसार शहर में आवासीय या व्यावसायिक भवनों के निर्माण के लिए आरडीए से मैप पास होना अनिवार्य होता है। सरकारी भवनों के लिए भी नियमानुसार आरडीए से वैधता प्रमाणपत्र जरूरी है। खासकर अस्पताल और नर्सिंगहोम का संचालन सामुदायिक श्रेणी की भूमि पर ही हो सकता है।
अब तक एम्स की पूरी जमीन कृषि योग्य थी। ऐसे में निर्मित होने वाले भवनों को वैध करने में दिक्कतें आ रही थीं। शासन के अनुमोदन के बाद ही भवनों को वैध किया जा सका। अब महायोजना में एम्स की जमीन के भू प्रयोग को सामुदायिक घोषित कर दिए जाने के बाद एम्स में होने वाले किसी भी निर्माण को आरडीए से वैध होने का प्रमाणपत्र आसानी से मिल सकेगा।
ऐसा होने के बाद एम्स के विस्तार में भी तेजी आएगी क्योंकि शासन से बजट जारी होने में निर्माण के मैप के पास होने की प्रक्रिया को भी शामिल किया जाता है। रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता एम अहमद का कहना है कि महायोजना-2031 में एम्स के पूरे परिसर की जमीन के भू प्रयोग को सामुदायिक कर दिया गया है। एम्स के पीछे के कुछ भाग को आवासीय घोषित किया गया है।
एम्स के पीछे अब पास हो सकेंगे आवासों के नक्शे
एम्स की बाउंड्री से पीछे की जमीन अब तक कृषि योग्य भूमि थी। जमीनों पर तमाम आवास भी बन चुके हैं। रायबरेली विकास प्राधिकरण ने एम्स के पीछे की जमीन के भू प्रयोग को आवासीय घोषित कर दिया है। ऐसा होने के बाद लोग अपने आवासीय भवनों को अब आसानी से वैध करवा सकेंगे। ऐसा होने के बाद एम्स के पीछे जमीन की कीमतें भी बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।