पुलिस विभाग में तैनात दंड बाबू ने बड़ा खेल किया। विभागीय जांच में दोषी हेड कांस्टेबल की फाइल करीब एक साल तक दबाए बैठे रहे। जब हेड कांस्टेबल के सेवानिवृत्त के चंद दिन बचे तब फाइल अफसरों के सामने रखी।
अफसर ने मामले का संज्ञान लिया। बाबू का खेल पकड़ा। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर डीसीपी मुख्यालय ने उसको निलंबित कर दिया। प्रेम सागर नाम का हेड कांस्टेबल करीब डेढ़ साल पहले ट्रेन में जुआ खेलते पकड़ा गया था।
विभागीय कार्रवाई करते हुए उसको पुलिस लाइन भेज दिया गया था। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद दंडात्मक कार्रवाई चल रही थी। करीब एक साल पहले प्रकरण की फाइल दंड बाबू भरत मिश्रा के पास पहुंची थी।
जिसे अफसरों के सामने पेश करना था, जिससे दंडात्मक कार्रवाई पूरी हो सके। सूत्रों के मुताबिक बाबू ने मामले में खेल कर दिया। फाइल दबाए रहे, जिससे हेड कांस्टेबल बचा रहे। अब जब 31 मार्च को हेड कांस्टेबल काे रिटायरमेंट है तब बाबू ने संबंधित अफसर के पास उसकी फाइल रखी। अधिकारी ने इसको गंभीरता से लिया। बाबू का खेल पकड़ लिया। उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद भरत मिश्रा को निलंबित कर दिया गया।
कई और भी थीं शिकायतें
पुलिस विभाग में दंड बाबू की जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। पुलिसकर्मियों का दंड निर्धारण, रोल को अपडेट करना व अन्य महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। बाबू तमाम मामलों में खेल करते रहते हैं। मकसद रहता है संबंधित पुलिसकर्मी को दंड से बचाना। वह ऐसी फाइलों को वह दबा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक दंड बाबू भरत मिश्रा को लेकर कई और शिकायतें थीं। कार्य में लापरवाही बरतना भी महंगा पड़ा।