फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिस कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने किया आपातकाल का विरोध

Fri, 12 Apr 2019 01:52 AM IST
sahaj sahaj न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
हेमवती नंदन बहुगुणा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आमतौर पर लोग मानते हैं कि हेमवती नंदन बहुगुणा आपातकाल के समर्थक थे। पर, यह सच नहीं है। बेशक बहुगुणा ने कई मौकों पर इंदिरा गांधी का साथ भी दिया। शायद यही वजह थी कि इंदिरा गांधी ने लखनऊ विवि में पीएसी विद्रोह के बाद कमलापति त्रिपाठी की जगह उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर भी बैठा दिया। पर, बहुगुणा ने आंख बंदकर उनकी बात नहीं मानी। इंदिरा गांधी को भरोसा था कि बहुगुणा पूरी तरह उनके इशारे पर काम करेंगे। पर, वह तो किसी और ही मिट्टी के बने हुए थे। राज्यसभा चुनाव में जब कांग्रेस ने बहुगुणा के मना करने के बावजूद केके बिड़ला को नौवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया तो बहुगुणा ने उन्हें चुनाव हरवा दिया। इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी इससे काफी नाराज हो गए। बहुगुणा के मित्र रामनरेश त्रिपाठी ने संस्मरण लिखा है, ‘बिड़ला जैसे कुछ मुद्दों को लेकर इंदिरा गांधी और संजय गांधी, बहुगुणा से काफी नाराज थे। इसी बीच इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगा दिया। बहुगुणा इससे सहमत नहीं थे। उन्होंने इंदिरा गांधी को आपातकाल के विरोध में पत्र भी लिखा लेकिन उसका उत्तर नहीं आया। इधर, बहुगुणा के कई मित्रों व शुभचिंतकों को मीसा में पकड़ लिया गया। बहुगुणा इससे काफी दुखी व आहत महसूस करने लगे। काफी कोशिशों के बाद आखिरकार 7 सितंबर 1975 को बहुगुणा को इंदिरा गांधी से मिलने का वक्त मिला। उन्होंने श्रीमती गांधी से स्पष्ट कहा, ‘इंदिरा जी! इमरजेंसी ‘काउंटर प्रोडक्टिव’ है। देश की तरक्की के लिए ठीक नहीं है। इसे समाप्त कर दीजिए। आपातकाल तो समाप्त नहीं हुआ लेकिन इंदिरा जी की बहुगुणा से नाराजगी बढ़ गई।’
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें