यूपी के पूर्वांचल के तमाम जिलों में नक्सलियों की बढ़ती सक्रियता और उनके खतरनाक मंसूबों का पता लगने के बाद एनआईए ने पांच सितंबर को वाराणसी, प्रयागराज, चंदौली, देवरिया, आजमगढ़ समेत कई जिलों में छापा मारा था। इस दौरान तमाम संदिग्ध दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, डायरी, आदि मिलने के बाद एनआईए ने लखनऊ स्थित अपने थाने पर मुकदमा दर्ज किया था। जांच में नक्सली नेटवर्क के तार बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से भी जुड़े होने के प्रमाण मिले थे।
एनआईए की जांच में सामने आया था कि बिहार की जेल में बंद प्रमोद मिश्रा पूर्वांचल में नक्सली संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए सीपीआई (माओवादी) कैडर तथा ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यूएस) का नेतृत्व कर रहा था। कोर कमेटी द्वारा प्रमोद मिश्रा को पूर्वांचल के कई फ्रंटल संगठनों और छात्र विंग को संगठित कर भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने का काम सौंपा गया था।
इस मामले में एनआईए द्वारा दर्ज की गई पहली एफआईआर में आरोपी मनीष आजाद और रितेश विद्यार्थी और उनके सहयोगियों विश्वविजय, सीमा आजाद पत्नी विश्वविजय, अमिता शिरीन को नामजद किया गया था। जांच में सामने आया था कि मनीष आजाद, कृपा शंकर, सोनी आजाद, रितेश विद्यार्थी, आकांक्षा आजाद और राजेश आजाद आदि सीपीआई (माओवादी) संगठन को पूर्वांचल में जिंदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
एनआईए ने भगत सिंह छात्र मोर्चा की बीएचयू से जुड़ी दो छात्राओं आकांक्षा आजाद और सिद्धि से भी पूछताछ की थी। दोनों के कमरे से एक मोबाइल, दो लैपटॉप, पत्रिकाएं और कागजात जब्त किए थे।
आकांक्षा आजाद से एनआईए ने लखनऊ में भी पूछताछ की थी। वहीं बिहार पुलिस ने इस संगठन से जुड़ी एक अवैध शस्त्र फैक्ट्री पर छापा मारकर तमाम हथियार बरामद किए थे, जिनका इस्तेमाल यूपी और बिहार में होना था। वहीं बलिया में गिरफ्तार नक्सलियों के तार भी प्रमोद मिश्रा से जुड़े होने की वजह से एनआईए ने एटीएस द्वारा दर्ज मुकदमे को भी टेकओवर कर लिया है।