लखनऊ। कोरोना संदिग्ध रोगी की मौत के बाद अब बिना जांच रिपोर्ट आए डॉक्टर पोस्टमार्टम नहीं करेंगे। इसका डॉक्टरों ने विरोध शुरू कर दिया है। सीएमओ व जिला प्रशासन की लापरवाही से दो डॉक्टर समेत अन्य स्टाफ क्वारंटीन में भेजा गया है। डॉक्टरों ने सुरक्षा के लिहाज से बिना जांच रिपोर्ट पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया है। वहीं सीएमओ का कहना है कि डीएम के आदेश पर पोस्टमार्टम हुआ था जिसमें डॉक्टरों ने पीपीई किट समेत सभी प्रोटोकॉल का पालन किया था। मालूम हो कि अयोध्या के गोसाईंगंज मैनपुर का मजदूर विनोद उपाध्याय (42) मंगलवार रात को महाराष्ट्र से आई ट्रेन से मृत मिला था। वह कोरोना पॉजिटिव था। बिना जांच कराए ही देर रात डीएम-सीएमओ ने उसका पोस्टमार्टम करा दिया। रिपोर्ट आने पर स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के अफसरों के होश उड़ गए। अफसरों की लापरवाही का खामियाजा डॉक्टर व स्टाफ को भुगतना पड़ा। उन्हें क्वारंटीन में जाना पड़ा। वहीं स्वास्थ्य विभाग-रेलवे मिलाकर करीब 60 लोगों की सूची बनी है जिसमें अभी तक महज सात लोग क्वारंटीन में भेजे गए हैं। वहीं डॉक्टरों ने कोरोना संदिग्ध मरीजों की बिना जांच कराए पोस्टमार्टम न करने का फैसला लिया है। इसे लेकर डॉक्टरों ने विरोध भी जताया है। हालांकि आला अफसर पूरे मामले में हुई फजीहत को दबाने में जुटे हैं। मर्च्युरी में अगर कोरोना संक्रमित मजदूर का पोस्टमार्टम कराने में प्रोटोकॉल का पालन हुआ तो डॉक्टर समेत सात लोगों का स्टाफ क्वारंटीन में क्यों भेज दिया गया। इसका जवाब सीएमओ के पास नहीं है। अफसरों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। इस मसले पर कोई भी बोलने को तैयार नहीं है। वहीं सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल का कहना है कि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन हुआ था तभी पोस्टमार्टम कराया गया है।