मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है तो डिजिटल ट्रांजेक्शन की ओर जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूपी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में 54 लाख परिवारों को आवास का पैसा दिया गया है, इसमें कोई मध्यस्थ नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तो बीसी सखी केवल बैंकिंग लेनदेन का काम कर रही हैं। जल्दी ही अन्य कार्यों में अपनी भागीदारी के जरिये सफलता की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ेंगी।
बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने 50 हजार ग्राम पंचायतों में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए समर्थ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जूपिटर हॉल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को आंगनबाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार वितरण का कार्य सौंपा गया है। बुंदेलखंड की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का प्रयोग सफल रहा है। ऐसे कार्यक्रम प्रत्येक ग्राम पंचायत में शुरू किया जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों में बन रहे ग्राम सचिवालय में बीसी सखी के बैठने की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम सचिवालय मिशन शक्ति के तहत चलाए जा रहे महिला सुरक्षा संबंधी कार्यक्रम, राजस्व, सभी विभागों की समीक्षा का केंद्र होगा। इस अवसर पर देश की 75 बीसी सखी की सफल केस स्टडी पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। चार बीसी सखी को नियुक्ति पत्र और चार बीसी सखी को पॉस मशीन का वितरण किया गया।
बीसी सखी ने 5.57 करोड़ ट्रांजेक्शन किए
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न योजनाओं में डीबीटी के माध्यम से 3.30 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश डिजिटल ट्रांजेक्शन के क्षेत्र में पूरे देश में अग्रणी है। प्रदेश की लगभग 56,000 ग्राम पंचायतों में से 55,056 में बीसी सखी के चयन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। करीब 51,000 बीसी सखी को प्रशिक्षण दिया गया है। 41,000 बीसी सखी काम कर रही हैं। सभी बीसी सखी ने अब तक पांच करोड़ 57 लाख से अधिक ट्रांजेक्शन कर 13,465 करोड़ रुपये का लेन-देन किया है। बीसी सखी को 35.23 करोड़ का लाभांश मिला है। प्रदेश में बीसी सखियां स्वयं मिनी ब्रांच बन गई हैं। उन्होंने कहा कि शासन की योजना का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति तक बिना किसी रुकावट, बैरियर के देना ही सुशासन का लक्ष्य है। यही रामराज्य की अवधारणा है।
बीसी सखी का बैंक बनेगा, जिस सखी का एनपीए एक प्रतिशत, उन्हें विशेष पुरस्कार
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अब बीसी सखी की बड़ी भूमिका है। वह दिन दूर नहीं जब बीसी सखी का बैंक भी होगा। उन्होंने कहा कि जिस बीसी सखी का एनपीए एक प्रतिशत होगा, उन्हें विशेष पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीसी सखी की सिविल रेटिंग होनी चाहिए। अधिक रेटिंग वाले समूह को लोन में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक बीसी सखी नियुक्त करने का लक्ष्य है। कार्यक्रम में राज्यमंत्री विजयलक्ष्मी गौतम भी मौजूद थीं।
महिलाएं विश्वास का प्रतीक बनीं : केशव
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपनी पहचान बनाई है। महिलाएं विश्वास का प्रतीक बन गई हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि, घर के कामकाज में व्यस्त रहने वाली महिलाएं अब बीसी सखी के रूप में बैंक को घर घर ले जा रही हैं।
बैंकों से लेन देन की सीमा बढ़ाएं
सुलतानपुर की बीसी सखी प्रियंका मौर्य ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि बीसी सखी अभी केवल दस हजार रुपये निकालने और 20 हजार रुपये जमा करा सकती हैं। इस सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि बैंकों में बीसी सखी को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता है। इससे उनका कामकाज प्रभाविता होता है। बिहार के भोजपुर जिले की बीसी सखी रूबी कुमारी ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 5,000 जनधन खाते खोले हैं। अब तक 57 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया है। 20 लाख रुपये कमीशन मिला है।