परिषदीय विद्यालयों में शनिवार से नए सत्र 2023-24 की शुरुआत हुई। पहले दिन स्कूल पहुंचे बच्चों का कई जगह चंदन-टीका लगाकर स्वागत किया गया। वहीं पहले दिन ही कक्षा तीन से आठ के बच्चों को सभी विषय की किताबें मिली तो वे चहक उठे। हालांकि रायबरेली, अमेठी आदि कुछ जिलों में किताबें उपलब्ध न होने के कारण बच्चों को पुरानी किताबों से ही पढ़ाई की शुरुआत करनी पड़ी।
लखनऊ में राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सरोजनीनगर में और सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल ने बीकेटी के रायपुर में बच्चों को किताबें वितरित की। गोंडा में पहले दिन ही 66 हजार 954 बच्चों का स्कूल में नामांकन किया गया। साथ ही जनप्रतिनिधियों ने बच्चों को पांच लाख किताबें भी बांटी। गौरा में भाजपा विधायक प्रभात वर्मा ने स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया। सीतापुर के बिसवां में स्वास्थ्य एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ किया।
अयोध्या के 70 फीसदी विद्यालयों में पहले दिन ही किताबों का वितरण कर दिया गया। अंबेडकरनगर में सौ स्कूलों के दस हजार छात्रों को नई किताबें दी गईं। बाराबंकी में 16 लाख बच्चों को किताबें बांटी गईं। सीतापुर में 20 लाख किताबें बांटने का दावा किया गया। वहीं सुल्तानपुर में बारिश के कारण स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति कम रही, इसलिए किताबों का वितरण टाल दिया गया। रायबरेली के ज्यादातर विद्यालयों में किताबें बांटने के नाम पर खानापूर्ति की गई।
कई स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं। इससे कहीं बच्चों ने खेलकूद में पहला दिन बिताया तो कहीं पुरानी किताबों से बच्चे पढ़ते नजर आए। अमेठी में भी ज्यादातर स्कूलों में किताबों का वितरण नहीं हो पाया। पहली से तीसरी के बच्चों को पुरानी किताबें दी गईं। इसी प्रकार विभिन्न जिलों में जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने बच्चों को किताबें वितरित की। बेसिक शिक्षा विभाग का यह लक्ष्य था कि पहले दिन ही स्कूलों में बच्चों को किताबें मिल जाएं ताकि वे समय से पठन-पाठन शुरू कर सकें।