आयोग की सचिव की ओर से लिखे गए पत्र में बच्चों के पोषण के लिए संचालित कार्यक्रमों का हवाला देते हुए कहा गया है कि मौजूदा समय में प्रदेश में 1.88 लाख से आंगनबाड़ी केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से करीब 1.5 करोड़ बच्चों और 40 लाख गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण की निगरानी की जा रही है। इसके लिए सरकार ने 3.50 लाख से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकायों को नियुक्त कर रखा है।
वहीं खाद्य सुरक्षा अधिनियम में साल में कम से कम 300 दिन आंगनबाड़ी केंद्रों को संचालित करने का प्रावधान है। लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के गैर विभागीय और चुनाव संबंधी कार्यों में ड्यूटी लगा देने से पोषण कार्यक्रम बाधित हो जाता है। आयोग ने सभी डीएम से बाल अधिकारों के संरक्षण केलिए केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय बाल संरक्षण नीति, नई शिक्षा नीति और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन कराने का अनुरोध किया है। साथ ही इस सबंध में की गई कार्यवाही से आयोग को अवगत कराने को कहा गया है।