फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुना है क्या: 'छोटे मियां शुभान अल्लाह', साथ ही 'पत्ता कटने का डर और अफसर को वास्तु दोष से डर' के किस्से

Mon, 31 Aug 2026 10:20 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
विज्ञापन
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'छोटे मियां शुभान अल्लाह' की कहानी। इसके अलावा 'पत्ता कटने का डर' और 'वास्तु दोष दूर कराने में फंसा कर्मी' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

छोटे मियां शुभान अल्लाह

प्रदेश के पढ़ाई लिखाई वाले विभाग में बहुप्रतीक्षित पदोन्नति की प्रक्रिया पर काफी निगाहें लगी हुई हैं। इसमें जहां वरिष्ठ स्तर पर कुछ पेंच होने से फाइल की गति अपेक्षाकृत धीमी और पेचीदा है। वहीं, उम्मीद यह थी कि जब वरिष्ठों की पदोन्नति होगी तो उनके बाद वालों का नंबर आएगा। हाल ही में पता चला कि वरिष्ठों की फाइल में पेंच के कारण तारीख नहीं मिली और दूसरे नंबर वालों की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ गई। इस पर किसी ने कहा कि बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां तो शुभान अल्लाह निकले।

पत्ता कटने का डर

राजधानी के नजदीक वाली नगरी के एक माननीय इन दिनों ज्यादा ही बेचैन हैं। वजह विकास कार्य नहीं, बल्कि सियासी मौसम में अचानक बढ़ी हलचल है। खबर है कि एक पुराने कांग्रेसी नेता ने फिर से घोड़े खोल दिए हैं। अब पीतांबर वस्त्र प्रेमी माननीय को हर आहट में टिकट की दस्तक सुनाई दे रही है। कभी समर्थकों की गिनती होती है तो कभी पुराने रिश्तों की। उधर घोड़े दौड़ रहे हैं और इधर बेचैनी बढ़ रही है। पांच साल तक क्षेत्र में मजबूत दिखने वाले माननीय अब यही सोच रहे हैं कि कहीं टिकट की दौड़ में उनका ही पत्ता न कट जाए।

वास्तु दोष दूर कराने में फंसा कर्मी

सेहत महकमे के एक अफसर को वास्तु दोष से डर लगता है। वह जिस भी ऑफिस में जाते हैं, पहले उसका दोष दुरुस्त कराते हैं। पिछले माह उन्हें नए कमरे में बैठने की जगह दी गई। वह कमरे में गए लेकिन बैठे नहीं। फिर एक जानकार को बुलाया और उससे वास्तु दोष के उपाय करने का निर्देश दिया। उस कर्मी ने कुछ विद्वानों को बुलाया। मंत्रोच्चार तो हुआ लेकिन दक्षिणा देने की बारी आई तो अफसर खिसक लिए। ऐसे में बुलाने वाले को दक्षिणा देनी पड़ी। अब यह कर्मी अफसर के कारनामे का गाना गा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें